249 | GEN 10:14 | फ़तरूसी, कसलूही (जिनसे फ़िलिस्ती निकले) और कफ़तूरी। |
326 | GEN 13:7 | अब्राम और लूत के चरवाहे आपस में झगड़ने लगे। (उस ज़माने में कनानी और फ़रिज़्ज़ी भी मुल्क में आबाद थे।) |
340 | GEN 14:3 | कनान के इन पाँच बादशाहों का इत्तहाद हुआ था और वह वादीए-सिद्दीम में जमा हुए थे। (अब सिद्दीम नहीं है, क्योंकि उस की जगह बहीराए-मुरदार आ गया है)। |
354 | GEN 14:17 | जब अब्राम किदरलाउमर और उसके इत्तहादियों पर फ़तह पाने के बाद वापस पहुँचा तो सदूम का बादशाह उससे मिलने के लिए वादीए-सवी में आया। (इसे आजकल बादशाह की वादी कहा जाता है।) |
569 | GEN 22:21 | उसके पहलौठे ऊज़ के बाद बूज़, क़मुएल (अराम का बाप), |
571 | GEN 22:23 | मिलकाह और नहूर के हाँ यह आठ बेटे पैदा हुए। (बतुएल रिबक़ा का बाप था)। |
607 | GEN 24:15 | वह अभी दुआ कर ही रहा था कि रिबक़ा शहर से निकल आई। उसके कंधे पर घड़ा था। वह बतुएल की बेटी थी (बतुएल इब्राहीम के भाई नहूर की बीवी मिलकाह का बेटा था)। |
679 | GEN 25:20 | इसहाक़ 40 साल का था जब उस की रिबक़ा से शादी हुई। रिबक़ा लाबन की बहन और अरामी मर्द बतुएल की बेटी थी (बतुएल मसोपुतामिया का था)। |
689 | GEN 25:30 | उसने कहा, “मुझे जल्दी से लाल सालन, हाँ इसी लाल सालन से कुछ खाने को दो। मैं तो बेदम हो रहा हूँ।” (इसी लिए बाद में उसका नाम अदोम यानी सुर्ख़ पड़ गया।) |
793 | GEN 28:19 | उसने मक़ाम का नाम बैतेल यानी ‘अल्लाह का घर’ रखा (पहले साथवाले शहर का नाम लूज़ था)। |
820 | GEN 29:24 | (लाबन ने लियाह को अपनी लौंडी ज़िलफ़ा दे दी थी ताकि वह उस की ख़िदमत करे।) |
825 | GEN 29:29 | (लाबन ने राख़िल को अपनी लौंडी बिलहाह दे दी ताकि वह उस की ख़िदमत करे।) |
1039 | GEN 35:27 | फिर याक़ूब अपने बाप इसहाक़ के पास पहुँच गया जो हबरून के क़रीब ममरे में अजनबी की हैसियत से रहता था (उस वक़्त हबरून का नाम क़िरियत-अरबा था)। वहाँ इसहाक़ और उससे पहले इब्राहीम रहा करते थे। |
1042 | GEN 36:1 | यह एसौ की औलाद का नसबनामा है (एसौ को अदोम भी कहा जाता है) : |
1063 | GEN 36:22 | लोतान होरी और हेमाम का बाप था। (तिमना लोतान की बहन थी।) |
1080 | GEN 36:39 | उस की मौत पर हदद जो फ़ाऊ शहर का था (बीवी का नाम महेतबेल बिंत मतरिद बिंत मेज़ाहाब था)। |
1136 | GEN 38:16 | वह रास्ते से हटकर उसके पास गया और कहा, “ज़रा मुझे अपने हाँ आने दें।” (उसने नहीं पहचाना कि यह मेरी बहू है)। तमर ने कहा, “आप मुझे क्या देंगे?” |
1397 | GEN 46:10 | शमौन के बेटे यमुएल, यमीन, उहद, यकीन, सुहर और साऊल थे (साऊल कनानी औरत का बच्चा था)। |
1399 | GEN 46:12 | यहूदाह के बेटे एर, ओनान, सेला, फ़ारस और ज़ारह थे (एर और ओनान कनान में मर चुके थे)। फ़ारस के दो बेटे हसरोन और हमूल थे। |
1459 | GEN 48:7 | मैं यह तेरी माँ राख़िल के सबब से कर रहा हूँ जो मसोपुतामिया से वापसी के वक़्त कनान में इफ़राता के क़रीब मर गई। मैंने उसे वहीं रास्ते में दफ़न किया” (आज इफ़राता को बैत-लहम कहा जाता है)। |
1581 | EXO 3:1 | मूसा अपने सुसर यितरो की भेड़-बकरियों की निगहबानी करता था (मिदियान का इमाम रऊएल यितरो भी कहलाता था)। एक दिन मूसा रेवड़ को रेगिस्तान की परली जानिब ले गया और चलते चलते अल्लाह के पहाड़ होरिब यानी सीना तक पहुँच गया। |
1671 | EXO 6:15 | शमौन के पाँच बेटे यमुएल, यमीन, उहद, यकीन, सुहर और साऊल थे। (साऊल कनानी औरत का बच्चा था)। इनसे शमौन की पाँच शाख़ें निकलीं। |
1672 | EXO 6:16 | लावी के तीन बेटे जैरसोन, क़िहात और मिरारी थे। (लावी 137 साल की उम्र में फ़ौत हुआ)। |
1674 | EXO 6:18 | क़िहात के चार बेटे अमराम, इज़हार, हबरून और उज़्ज़ियेल थे। (क़िहात 133 साल की उम्र में फ़ौत हुआ)। |
1676 | EXO 6:20 | अमराम ने अपनी फूफी यूकबिद से शादी की। उनके दो बेटे हारून और मूसा पैदा हुए। (अमराम 137 साल की उम्र में फ़ौत हुआ)। |
1679 | EXO 6:23 | हारून ने इलीसिबा से शादी की। (इलीसिबा अम्मीनदाब की बेटी और नहसोन की बहन थी)। उनके चार बेटे नदब, अबीहू, इलियज़र और इतमर थे। |
1810 | EXO 11:3 | (रब ने मिसरियों के दिल इसराईलियों की तरफ़ मायल कर दिए थे। वह फ़िरौन के ओहदेदारों समेत ख़ासकर मूसा की बड़ी इज़्ज़त करते थे)। |
1984 | EXO 16:36 | (जो पैमाना इसराईली मन के लिए इस्तेमाल करते थे वह दो लिटर का एक बरतन था जिसका नाम ओमर था।) |
2656 | EXO 38:22 | (यहूदाह के क़बीले के बज़लियेल बिन ऊरी बिन हूर ने वह सब कुछ बनाया जो रब ने मूसा को बताया था। |
2658 | EXO 38:24 | उस सोने का वज़न जो लोगों के हदियों से जमा हुआ और मक़दिस की तामीर के लिए इस्तेमाल हुआ तक़रीबन 1,000 किलोग्राम था (उसे मक़दिस के बाटों के हिसाब से तोला गया)। |
2659 | EXO 38:25 | तामीर के लिए चाँदी जो मर्दुमशुमारी के हिसाब से वसूल हुई, उसका वज़न तक़रीबन 3,430 किलोग्राम था (उसे भी मक़दिस के बाटों के हिसाब से तोला गया)। |
3022 | LEV 11:24 | जो भी ज़ैल के जानवरों की लाशें छुए वह शाम तक नापाक रहेगा : (अलिफ़) खुर रखनेवाले तमाम जानवर सिवाए उनके जिनके खुर या पाँव पूरे तौर पर चिरे हुए हैं और जो जुगाली करते हैं, (बे) तमाम जानवर जो अपने चार पंजों पर चलते हैं। यह जानवर तुम्हारे लिए नापाक हैं, और जो भी उनकी लाशें उठाए या छुए लाज़िम है कि वह अपने कपड़े धो ले। इसके बावुजूद भी वह शाम तक नापाक रहेगा। |
3166 | LEV 14:54 | लाज़िम है कि हर क़िस्म की वबाई बीमारी से ऐसे निपटो जैसे बयान किया गया है, चाहे वह वबाई जिल्दी बीमारियाँ हों (मसलन ख़ारिश, सूजन, पपड़ी या सफ़ेद दाग़), चाहे कपड़ों या घरों में फफूँदी हो। |
3573 | LEV 27:2 | “इसराईलियों को बताना कि अगर किसी ने मन्नत मानकर किसी को रब के लिए मख़सूस किया हो तो वह उसे ज़ैल की रक़म देकर आज़ाद कर सकता है (मुस्तामल सिक्के मक़दिस के सिक्कों के बराबर हों) : |
3740 | NUM 3:47 | हर एक के एवज़ चाँदी के पाँच सिक्के ले जो मक़दिस के वज़न के मुताबिक़ हों (फ़ी सिक्का तक़रीबन 11 ग्राम)। |
3743 | NUM 3:50 | यों उसने चाँदी के 1,365 सिक्के (तक़रीबन 16 किलोग्राम) जमा करके |
3937 | NUM 7:86 | बख़ूर से भरे हुए सोने के प्यालों का कुल वज़न तक़रीबन डेढ़ किलोग्राम था (फ़ी प्याला 110 ग्राम)। |
4098 | NUM 13:22 | वह दश्ते-नजब से गुज़रकर हबरून पहुँचे जहाँ अनाक़ के बेटे अख़ीमान, सीसी और तलमी रहते थे। (हबरून को मिसर के शहर ज़ुअन से सात साल पहले तामीर किया गया था)। |
4109 | NUM 13:33 | हमने वहाँ देवक़ामत अफ़राद भी देखे। (अनाक़ के बेटे देवक़ामत के अफ़राद की औलाद थे)। उनके सामने हम अपने आपको टिड्डी जैसा महसूस कर रहे थे, और हम उनकी नज़र में ऐसे थे भी।” |
4274 | NUM 18:16 | जब वह एक माह के हैं तो उनके एवज़ चाँदी के पाँच सिक्के देना। (हर सिक्के का वज़न मक़दिस के बाटों के मुताबिक़ 11 ग्राम हो)। |
4570 | NUM 27:14 | क्योंकि तुम दोनों ने दश्ते-सीन में मेरे हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी की। उस वक़्त जब पूरी जमात ने मरीबा में मेरे ख़िलाफ़ गिला-शिकवा किया तो तूने चटान से पानी निकालते वक़्त लोगों के सामने मेरी क़ुद्दूसियत क़ायम न रखी।” (मरीबा दश्ते-सीन के क़ादिस में चश्मा है।) |
4986 | DEU 3:9 | (सैदा के बाशिंदे हरमून को सिरयून कहते हैं जबकि अमोरियों ने उसका नाम सनीर रखा)। |
4990 | DEU 3:13 | जिलियाद का शिमाली हिस्सा और बसन का मुल्क मैंने मनस्सी के आधे क़बीले को दिया। (बसन में अरजूब का इलाक़ा है जहाँ पहले ओज बादशाह की हुकूमत थी और जो रफ़ाइयों यानी देवक़ामत अफ़राद का मुल्क कहलाता था। |
4994 | DEU 3:17 | उस की मग़रिबी सरहद दरियाए-यरदन है यानी किन्नरत (गलील) की झील से लेकर बहीराए-मुरदार तक जो पिसगा के पहाड़ी सिलसिले के दामन में है। |
5192 | DEU 10:4 | रब ने उन तख़्तियों पर दुबारा वह दस अहकाम लिख दिए जो वह पहली तख़्तियों पर लिख चुका था। (उन्हीं अहकाम का एलान उसने पहाड़ पर आग में से किया था जब तुम उसके दामन में जमा थे।) फिर उसने यह तख़्तियाँ मेरे सुपुर्द कीं। |
5194 | DEU 10:6 | (इसके बाद इसराईली बनी-याक़ान के कुओं से रवाना होकर मौसीरा पहुँचे। वहाँ हारून फ़ौत हुआ। उसे दफ़न करने के बाद उसका बेटा इलियज़र उस की जगह इमाम बना। |
6211 | JOS 15:7 | वहाँ से सरहद वादीए-अकूर में उतर गई और फिर दुबारा दबीर की तरफ़ चढ़ गई। दबीर से वह शिमाल यानी जिलजाल की तरफ़ जो दर्राए-अदुम्मीम के मुक़ाबिल है मुड़ गई (यह दर्रा वादी के जुनूब में है)। यों वह चलती चलती शिमाली सरहद ऐन-शम्स और ऐन-राजिल तक पहुँच गई। |
6217 | JOS 15:13 | रब के हुक्म के मुताबिक़ यशुअ ने कालिब बिन यफ़ुन्ना को उसका हिस्सा यहूदाह में दे दिया। वहाँ उसे हबरून शहर मिल गया। उस वक़्त उसका नाम क़िरियत-अरबा था (अरबा अनाक़ का बाप था)। |
6325 | JOS 19:2 | उसे यह शहर मिल गए : बैर-सबा (सबा), मोलादा, |
6370 | JOS 19:47 | अफ़सोस, दान का क़बीला अपने इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने में कामयाब न हुआ, इसलिए उसके मर्दों ने लशम शहर पर हमला करके उस पर फ़तह पाई और उसके बाशिंदों को तलवार से मार डाला। फिर वह ख़ुद वहाँ आबाद हुए। उस वक़्त लशम शहर का नाम दान में तबदील हुआ। (दान उनके क़बीले का बाप था।) |
6527 | JDG 1:16 | जब यहूदाह का क़बीला खजूरों के शहर से रवाना हुआ था तो क़ीनी भी उनके साथ यहूदाह के रेगिस्तान में आए थे। (क़ीनी मूसा के सुसर यितरो की औलाद थे)। वहाँ वह दश्ते-नजब में अराद शहर के क़रीब दूसरे लोगों के दरमियान ही आबाद हुए। |
6533 | JDG 1:22 | इफ़राईम और मनस्सी के क़बीले बैतेल पर क़ब्ज़ा करने के लिए निकले (बैतेल का पुराना नाम लूज़ था)। जब उन्होंने अपने जासूसों को शहर की तफ़तीश करने के लिए भेजा तो रब उनके साथ था। |
6556 | JDG 2:9 | उसे तिमनत-हरिस में उस की अपनी मौरूसी ज़मीन में दफ़नाया गया। (यह शहर इफ़राईम के पहाड़ी इलाक़े में जास पहाड़ के शिमाल में है।) |
7024 | JDG 18:29 | और उन्होंने उसका नाम अपने क़बीले के बानी के नाम पर दान रखा (दान इसराईल का बेटा था)। |
7083 | JDG 20:27 | उससे दरियाफ़्त किया कि हम क्या करें। (उस वक़्त अल्लाह के अहद का संदूक़ बैतेल में था |
7402 | 1SA 9:9 | साऊल ने कहा, “ठीक है, चलें।” वह शहर की तरफ़ चल पड़े ताकि मर्दे-ख़ुदा से बात करें। जब पहाड़ी ढलान पर शहर की तरफ़ चढ़ रहे थे तो कुछ लड़कियाँ पानी भरने के लिए निकलीं। आदमियों ने उनसे पूछा, “क्या ग़ैबबीन शहर में है?” (पुराने ज़माने में नबी ग़ैबबीन कहलाता था। अगर कोई अल्लाह से कुछ मालूम करना चाहता तो कहता, “आओ, हम ग़ैबबीन के पास चलें।”) |
8240 | 2SA 9:10 | अब आपकी ज़िम्मादारी यह है कि आप अपने बेटों और नौकरों के साथ उसके खेतों को सँभालें ताकि उसका ख़ानदान ज़मीनों की पैदावार से गुज़ारा कर सके। लेकिन मिफ़ीबोसत ख़ुद यहाँ रहकर मेरे बेटों की तरह मेरे साथ खाना खाया करेगा।” (ज़ीबा के 15 बेटे और 20 नौकर थे)। |
8266 | 2SA 11:4 | तब दाऊद ने क़ासिदों को बत-सबा के पास भेजा ताकि उसे महल में ले आएँ। औरत आई तो दाऊद उससे हमबिसतर हुआ। फिर बत-सबा अपने घर वापस चली गई। (थोड़ी देर पहले उसने वह रस्म अदा की थी जिसका तक़ाज़ा शरीअत माहवारी के बाद करती है ताकि औरत दुबारा पाक-साफ़ हो जाए)। |
8595 | 2SA 21:12 | तो वह यबीस-जिलियाद के बाशिंदों के पास गया और उनसे साऊल और उसके बेटे यूनतन की हड्डियों को लेकर साऊल के बाप क़ीस की क़ब्र में दफ़नाया। (जब फ़िलिस्तियों ने जिलबुअ के पहाड़ी इलाक़े में इसराईलियों को शिकस्त दी थी तो उन्होंने साऊल और यूनतन की लाशों को बैत-शान के चौक में लटका दिया था। तब यबीस-जिलियाद के आदमी चोरी चोरी वहाँ आकर लाशों को अपने पास ले गए थे।) दाऊद ने जिबिया में अब तक लटकी सात लाशों को भी उतारकर ज़िला में क़ीस की क़ब्र में दफ़नाया। ज़िला बिनयमीन के क़बीले की आबादी है। जब सब कुछ दाऊद के हुक्म के मुताबिक़ किया गया था तो रब ने मुल्क के लिए दुआएँ सुन लीं। |
8979 | 1KI 7:42 | ज़ंजीरों के ऊपर लगे अनार (फ़ी बालाई हिस्सा 200 अदद), |
9347 | 1KI 18:3 | इसलिए अख़ियब ने महल के इंचार्ज अबदियाह को बुलाया। (अबदियाह रब का ख़ौफ़ मानता था। |
9375 | 1KI 18:31 | उसने याक़ूब से निकले हर क़बीले के लिए एक एक पत्थर चुन लिया। (बाद में रब ने याक़ूब का नाम इसराईल रखा था)। |
10021 | 2KI 17:34 | यह सिलसिला आज तक जारी है। सामरिया के बाशिंदे अपने उन पुराने रिवाजों के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारते हैं और सिर्फ़ रब की परस्तिश करने के लिए तैयार नहीं होते। वह उस की हिदायात और अहकाम की परवा नहीं करते और उस शरीअत की पैरवी नहीं करते जो रब ने याक़ूब की औलाद को दी थी। (रब ने याक़ूब का नाम इसराईल में बदल दिया था।) |
10032 | 2KI 18:4 | उसने ऊँची जगहों के मंदिरों को गिरा दिया, पत्थर के उन सतूनों को टुकड़े टुकड़े कर दिया जिनकी पूजा की जाती थी और यसीरत देवी के खंबों को काट डाला। पीतल का जो साँप मूसा ने बनाया था उसे भी बादशाह ने टुकड़े टुकड़े कर दिया, क्योंकि इसराईली उन ऐयाम तक उसके सामने बख़ूर जलाने आते थे। (साँप नख़ुश्तान कहलाता था।) |
10045 | 2KI 18:17 | फिर भी असूर का बादशाह मुतमइन न हुआ। उसने अपने सबसे आला अफ़सरों को बड़ी फ़ौज के साथ लकीस से यरूशलम को भेजा (उनकी अपनी ज़बान में अफ़सरों के ओहदों के नाम तरतान, रब-सारिस और रबशाक़ी थे)। यरूशलम पहुँचकर वह उस नाले के पास रुक गए जो पानी को ऊपरवाले तालाब तक पहुँचाता है (यह तालाब उस रास्ते पर है जो धोबियों के घाट तक ले जाता है)। |
10177 | 2KI 23:8 | फिर यूसियाह तमाम इमामों को यरूशलम वापस लाया। साथ साथ उसने यहूदाह के शिमाल में जिबा से लेकर जुनूब में बैर-सबा तक ऊँची जगहों के उन तमाम मंदिरों की बेहुरमती की जहाँ इमाम पहले क़ुरबानियाँ पेश करते थे। यरूशलम के उस दरवाज़े के पास भी दो मंदिर थे जो शहर के सरदार यशुअ के नाम से मशहूर था। इनको भी यूसियाह ने ढा दिया। (शहर में दाख़िल होते वक़्त यह मंदिर बाईं तरफ़ नज़र आते थे।) |
10268 | 1CH 1:12 | फ़तरूसी, कसलूही (जिनसे फ़िलिस्ती निकले) और कफ़तूरी। |
10295 | 1CH 1:39 | लोतान के दो बेटे होरी और होमाम थे। (तिमना लोतान की बहन थी।) |
10306 | 1CH 1:50 | उस की मौत पर हदद जो फ़ाऊ शहर का था। (बीवी का नाम महेतबेल बिंत मतरिद बिंत मेज़ाहाब था।) |
10359 | 1CH 2:49 | शाफ़ (मदमन्ना का बाप) और सिवा (मकबेना और जिबिया का बाप) पैदा हुए। कालिब की एक बेटी भी थी जिसका नाम अकसा था। |
10536 | 1CH 6:63 | रूबिन के क़बीले से रेगिस्तान का बसर, यहज़, क़दीमात और मिफ़ात (यह शहर दरियाए-यरदन के मशरिक़ में यरीहू के मुक़ाबिल वाक़े हैं)। |
10719 | 1CH 11:42 | अदीना बिन सीज़ा (रूबिन के क़बीले का यह सरदार 30 फ़ौजियों पर मुक़र्रर था), |
10727 | 1CH 12:3 | उनका राहनुमा अख़ियज़र, फिर युआस (दोनों समाआह जिबियाती के बेटे थे), यज़ियेल और फ़लत (दोनों अज़मावत के बेटे थे), बराका, याहू अनतोती, |
11023 | 1CH 24:3 | दाऊद ने इमामों को ख़िदमत के मुख़्तलिफ़ गुरोहों में तक़सीम किया। सदोक़ और अख़ीमलिक ने इसमें दाऊद की मदद की (सदोक़ इलियज़र की औलाद में से और अख़ीमलिक इतमर की औलाद में से था)। |
11163 | 1CH 28:15 | सोने और चाँदी के चराग़दान और उनके चराग़ (मुख़्तलिफ़ चराग़दानों के वज़न फ़रक़ थे, क्योंकि हर एक का वज़न उसके मक़सद पर मुनहसिर था), |
11233 | 2CH 2:16 | सुलेमान ने इसराईल में आबाद तमाम ग़ैरमुल्कियों की मर्दुमशुमारी करवाई। (उसके बाप दाऊद ने भी उनकी मर्दुमशुमारी करवाई थी।) मालूम हुआ कि इसराईल में 1,53,600 ग़ैरमुल्की रहते हैं। |
11264 | 2CH 4:13 | ज़ंजीरों के ऊपर लगे अनार (फ़ी बालाई हिस्सा 200 अदद), |
11594 | 2CH 20:2 | एक क़ासिद ने आकर बादशाह को इत्तला दी, “मुल्के-अदोम से एक बड़ी फ़ौज आपसे लड़ने के लिए आ रही है। वह बहीराए-मुरदार के दूसरे किनारे से बढ़ती बढ़ती इस वक़्त हससून-तमर पहुँच चुकी है” (हससून ऐन-जदी का दूसरा नाम है)। |
12093 | EZR 2:61 | हबायाह, हक़्क़ूज़ और बरज़िल्ली के ख़ानदानों के कुछ इमाम भी वापस आए, लेकिन उन्हें रब के घर में ख़िदमत करने की इजाज़त न मिली। क्योंकि गो उन्होंने नसबनामे में अपने नाम तलाश किए उनका कहीं ज़िक्र न मिला, इसलिए उन्हें नापाक क़रार दिया गया। (बरज़िल्ली के ख़ानदान के बानी ने बरज़िल्ली जिलियादी की बेटी से शादी करके अपने सुसर का नाम अपना लिया था।) |
12183 | EZR 7:5 | बिन अबीसुअ बिन फ़ीनहास बिन इलियज़र बिन हारून था। (हारून इमामे-आज़म था)। |
12488 | NEH 7:63 | हबायाह, हक़्क़ूज़ और बरज़िल्ली के ख़ानदानों के कुछ इमाम भी वापस आए, लेकिन उन्हें रब के घर में ख़िदमत करने की इजाज़त न मिली। क्योंकि गो उन्होंने नसबनामे में अपने नाम तलाश किए लेकिन उनका कहीं ज़िक्र न मिला, इसलिए उन्हें नापाक क़रार दिया गया। (बरज़िल्ली के ख़ानदान के बानी ने बरज़िल्ली जिलियादी की बेटी से शादी करके अपने सुसर का नाम अपना लिया था।) |
12595 | NEH 11:3 | ज़ैल में सूबे के उन बुज़ुर्गों की फ़हरिस्त है जो यरूशलम में आबाद हुए। (अकसर लोग यहूदाह के बाक़ी शहरों और देहात में अपनी मौरूसी ज़मीन पर बसते थे। इनमें आम इसराईली, इमाम, लावी, रब के घर के ख़िदमतगार और सुलेमान के ख़ादिमों की औलाद शामिल थे। |
12743 | EST 2:15 | होते होते आस्तर बिंत अबीख़ैल की बारी आई (अबीख़ैल मर्दकी का चचा था, और मर्दकी ने उस की बेटी को लेपालक बना लिया था)। जब आस्तर से पूछा गया कि आप ज़नानख़ाने की क्या चीज़ें अपने साथ ले जाना चाहती हैं तो उसने सिर्फ़ वह कुछ ले लिया जो हैजा ख़्वाजासरा ने उसके लिए चुना। और जिसने भी उसे देखा उसने उसे सराहा। |
12758 | EST 3:7 | चुनाँचे अख़स्वेरुस बादशाह की हुकूमत के 12वें साल के पहले महीने नीसान में हामान की मौजूदगी में क़ुरा डाला गया। क़ुरा डालने से हामान यहूदियों को क़त्ल करने की सबसे मुबारक तारीख़ मालूम करना चाहता था। (क़ुरा के लिए ‘पूर’ कहा जाता था।) इस तरीक़े से 12वें महीने अदार का 13वाँ दिन निकला। |
12771 | EST 4:5 | तब आस्तर ने हताक ख़्वाजासरा को मर्दकी के पास भेजा ताकि वह मालूम करे कि क्या हुआ है, मर्दकी ऐसी हरकतें क्यों कर रहा है। (बादशाह ने हताक को आस्तर की ख़िदमत करने की ज़िम्मादारी दी थी।) |
13199 | JOB 14:14 | (क्योंकि अगर इनसान मर जाए तो क्या वह दुबारा ज़िंदा हो जाएगा?) फिर मैं अपनी सख़्त ख़िदमत के तमाम दिन बरदाश्त करता, उस वक़्त तक इंतज़ार करता जब तक मेरी सबुकदोशी न हो जाती। |
13226 | JOB 15:19 | (बापदादा से मुराद वह वाहिद लोग हैं जिन्हें उस वक़्त मुल्क दिया गया जब कोई भी परदेसी उनमें नहीं फिरता था)। |
13964 | PSA 3:3 | मेरे बारे में बहुतेरे कह रहे हैं, “अल्लाह इसे छुटकारा नहीं देगा।” (सिलाह) |
13966 | PSA 3:5 | मैं बुलंद आवाज़ से रब को पुकारता हूँ, और वह अपने मुक़द्दस पहाड़ से मेरी सुनता है। (सिलाह) |
13970 | PSA 3:9 | रब के पास नजात है। तेरी बरकत तेरी क़ौम पर आए। (सिलाह) |
13973 | PSA 4:3 | ऐ आदमज़ादो, मेरी इज़्ज़त कब तक ख़ाक में मिलाई जाती रहेगी? तुम कब तक बातिल चीज़ों से लिपटे रहोगे, कब तक झूट की तलाश में रहोगे? (सिलाह) |
13975 | PSA 4:5 | ग़ुस्से में आते वक़्त गुनाह मत करना। अपने बिस्तर पर लेटकर मामले पर सोच-बिचार करो, लेकिन दिल में, ख़ामोशी से। (सिलाह) |
14009 | PSA 7:6 | तो फिर मेरा दुश्मन मेरे पीछे पड़कर मुझे पकड़ ले। वह मेरी जान को मिट्टी में कुचल दे, मेरी इज़्ज़त को ख़ाक में मिलाए। (सिलाह) |
14048 | PSA 9:17 | रब ने इनसाफ़ करके अपना इज़हार किया तो बेदीन अपने हाथ के फंदे में उलझ गया। (हिग्गायून का तर्ज़। सिलाह) |
14052 | PSA 9:21 | ऐ रब, उन्हें दहशतज़दा कर ताकि अक़वाम जान लें कि इनसान ही हैं। (सिलाह) |
14200 | PSA 20:4 | वह तेरी ग़ल्ला की नज़रें याद करे, तेरी भस्म होनेवाली क़ुरबानियाँ क़बूल फ़रमाए। (सिलाह) |
14209 | PSA 21:3 | तूने उस की दिली ख़ाहिश पूरी की और इनकार न किया जब उस की आरज़ू ने होंटों पर अलफ़ाज़ का रूप धारा। (सिलाह) |
14264 | PSA 24:6 | यह होगा उन लोगों का हाल जो अल्लाह की मरज़ी दरियाफ़्त करते, जो तेरे चेहरे के तालिब होते हैं, ऐ याक़ूब के ख़ुदा। (सिलाह) |
14268 | PSA 24:10 | जलाल का बादशाह कौन है? रब्बुल-अफ़वाज, वही जलाल का बादशाह है। (सिलाह) |
14378 | PSA 32:4 | क्योंकि दिन-रात मैं तेरे हाथ के बोझ तले पिसता रहा, मेरी ताक़त गोया मौसमे-गरमा की झुलसती तपिश में जाती रही। (सिलाह) |