Wildebeest analysis examples for:   urd-urdgvh   छ    February 11, 2023 at 19:52    Script wb_pprint_html.py   by Ulf Hermjakob

4  GEN 1:4  अल्लाह ने देखा कि रौशनी अच्है, और उसने रौशनी को तारीकी से अलग कर दिया।
10  GEN 1:10  अल्लाह ने ख़ुश्क जगह को ज़मीन का नाम दिया और जमाशुदा पानी को समुंदर का। और अल्लाह ने देखा कि यह अच्है।
12  GEN 1:12  ज़मीन ने हरियावल पैदा की, ऐसे पौदे जो अपनी अपनी क़िस्म के बीज रखते और ऐसे दरख़्त जिनके फल अपनी अपनी क़िस्म के बीज रखते थे। अल्लाह ने देखा कि यह अच्है।
16  GEN 1:16  अल्लाह ने दो बड़ी रौशनियाँ बनाईं, सूरज जो बड़ा था दिन पर हुकूमत करने को और चाँद जो ोटा था रात पर। इनके अलावा उसने सितारों को भी बनाया।
18  GEN 1:18  दिन और रात पर हुकूमत करें और रौशनी और तारीकी में इम्तियाज़ पैदा करें। अल्लाह ने देखा कि यह अच्है।
21  GEN 1:21  अल्लाह ने बड़े बड़े समुंदरी जानवर बनाए, पानी की तमाम दीगर मख़लूक़ात और हर क़िस्म के पर रखनेवाले जानदार भी बनाए। अल्लाह ने देखा कि यह अच्है।
25  GEN 1:25  अल्लाह ने हर क़िस्म के मवेशी, रेंगनेवाले और जंगली जानवर बनाए। उसने देखा कि यह अच्है।
26  GEN 1:26  अल्लाह ने कहा, “आओ अब हम इनसान को अपनी सूरत पर बनाएँ, वह हमसे मुशाबहत रखे। वह तमाम जानवरों पर हुकूमत करे, समुंदर कीलियों पर, हवा के परिंदों पर, मवेशियों पर, जंगली जानवरों पर और ज़मीन पर के तमाम रेंगनेवाले जानदारों पर।”
28  GEN 1:28  अल्लाह ने उन्हें बरकत दी और कहा, “फलो-फूलो और तादाद में बढ़ते जाओ। दुनिया तुमसे भर जाए और तुम उस पर इख़्तियार रखो। समुंदर कीलियों, हवा के परिंदों और ज़मीन पर के तमाम रेंगनेवाले जानदारों पर हुकूमत करो।”
31  GEN 1:31  अल्लाह ने सब पर नज़र की तो देखा कि वह बहुत अच्बन गया है। शाम हुई, फिर सुबह। टा दिन गुज़र गया।
40  GEN 2:9  रब ख़ुदा के हुक्म पर ज़मीन में से तरह तरह के दरख़्त फूट निकले, ऐसे दरख़्त जो देखने में दिलकश और खाने के लिए अच्थे। बाग़ के बीच में दो दरख़्त थे। एक का फल ज़िंदगी बख़्शता था जबकि दूसरे का फल अच्और बुरे की पहचान दिलाता था।
48  GEN 2:17  लेकिन जिस दरख़्त का फल अच्और बुरे की पहचान दिलाता है उसका फल खाना मना है। अगर उसे खाए तो यक़ीनन मरेगा।”
49  GEN 2:18  रब ख़ुदा ने कहा, “अच्नहीं कि आदमी अकेला रहे। मैं उसके लिए एक मुनासिब मददगार बनाता हूँ।”
55  GEN 2:24  इसलिए मर्द अपने माँ-बाप को ोड़कर अपनी बीवी के साथ पैवस्त हो जाता है, और वह दोनों एक हो जाते हैं।
57  GEN 3:1  साँप ज़मीन पर चलने-फिरनेवाले उन तमाम जानवरों से ज़्यादा चालाक था जिनको रब ख़ुदा ने बनाया था। उसने औरत से पूा, “क्या अल्लाह ने वाक़ई कहा कि बाग़ के किसी भी दरख़्त का फल न खाना?”
59  GEN 3:3  सिर्फ़ उस दरख़्त के फल से गुरेज़ करना है जो बाग़ के बीच में है। अल्लाह ने कहा कि उसका फल न खाओ बल्कि उसे ूना भी नहीं, वरना तुम यक़ीनन मर जाओगे।”
61  GEN 3:5  बल्कि अल्लाह जानता है कि जब तुम उसका फल खाओगे तो तुम्हारी आँखें खुल जाएँगी और तुम अल्लाह की मानिंद हो जाओगे, तुम जो भी अच्और बुरा है उसे जान लोगे।”
62  GEN 3:6  औरत ने दरख़्त पर ग़ौर किया कि खाने के लिए अच्और देखने में भी दिलकश है। सबसे दिलफ़रेब बात यह कि उससे समझ हासिल हो सकती है! यह सोचकर उसने उसका फल लेकर उसे खाया। फिर उसने अपने शौहर को भी दे दिया, क्योंकि वह उसके साथ था। उसने भी खा लिया।
64  GEN 3:8  शाम के वक़्त जब ठंडी हवा चलने लगी तो उन्होंने रब ख़ुदा को बाग़ में चलते-फिरते सुना। वह डर के मारे दरख़्तों के पीुप गए।
66  GEN 3:10  आदम ने जवाब दिया, “मैंने तुझे बाग़ में चलते हुए सुना तो डर गया, क्योंकि मैं नंगा हूँ। इसलिए मैं ुप गया।”
67  GEN 3:11  उसने पूा, “किसने तुझे बताया कि तू नंगा है? क्या तूने उस दरख़्त का फल खाया है जिसे खाने से मैंने मना किया था?”
78  GEN 3:22  उसने कहा, “इनसान हमारी मानिंद हो गया है, वह अच्और बुरे का इल्म रखता है। अब ऐसा न हो कि वह हाथ बढ़ाकर ज़िंदगी बख़्शनेवाले दरख़्त के फल से ले और उससे खाकर हमेशा तक ज़िंदा रहे।”
83  GEN 4:3  कु देर के बाद क़ाबील ने रब को अपनी फ़सलों में से कु पेश किया।
84  GEN 4:4  हाबील ने भी नज़राना पेश किया, लेकिन उसने अपनी भेड़-बकरियों के कु पहलौठे उनकी चरबी समेत चढ़ाए। हाबील का नज़राना रब को पसंद आया,
86  GEN 4:6  रब ने पूा, “तू ग़ुस्से में क्यों आ गया है? तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है?
87  GEN 4:7  क्या अगर तू अच्नीयत रखता है तो अपनी नज़र उठाकर मेरी तरफ़ नहीं देख सकेगा? लेकिन अगर अच्नीयत नहीं रखता तो ख़बरदार! गुनाह दरवाज़े पर दबका बैठा है और तुझे चाहता है। लेकिन तेरा फ़र्ज़ है कि उस पर ग़ालिब आए।”
89  GEN 4:9  तब रब ने क़ाबील से पूा, “तेरा भाई हाबील कहाँ है?” क़ाबील ने जवाब दिया, “मुझे क्या पता! क्या अपने भाई की देख-भाल करना मेरी ज़िम्मादारी है?”
94  GEN 4:14  आज तू मुझे ज़मीन की सतह से भगा रहा है और मुझे तेरे हुज़ूर से भी ुप जाना है। मैं मफ़रूर की हैसियत से मारा मारा फिरता रहूँगा, इसलिए जिसको भी पता चलेगा कि मैं कहाँ हूँ वह मुझे क़त्ल कर डालेगा।”
140  GEN 6:2  तब आसमानी हस्तियों ने देखा कि बनी नौ इनसान की बेटियाँ ख़ूबसूरत हैं, और उन्होंने उनमें से कु चुनकर उनसे शादी की।
144  GEN 6:6  वहताया कि मैंने इनसान को बनाकर दुनिया में रख दिया है, और उसे सख़्त दुख हुआ।
145  GEN 6:7  उसने कहा, “गो मैं ही ने इनसान को ख़लक़ किया मैं उसे रूए-ज़मीन पर से मिटा डालूँगा। मैं न सिर्फ़ लोगों को बल्कि ज़मीन पर चलने-फिरने और रेंगनेवाले जानवरों और हवा के परिंदों को भी हलाक कर दूँगा, क्योंकि मैंताता हूँ कि मैंने उनको बनाया।”
154  GEN 6:16  कश्ती की को यों बनाना कि उसके नीचे 18 इंच खुला रहे। एक तरफ़ दरवाज़ा हो, और उस की तीन मनज़िलें हों।
155  GEN 6:17  मैं पानी का इतना बड़ा सैलाब लाऊँगा कि वह ज़मीन के तमाम जानदारों को हलाक कर डालेगा। ज़मीन पर सब कु फ़ना हो जाएगा।
160  GEN 6:22  नूह ने सब कु वैसा ही किया जैसा अल्लाह ने उसे बताया।
169  GEN 7:9  नरो-मादा की सूरत में दो दो होकर वह नूह के पास आकर कश्ती में सवार हुए। सब कु वैसा ही हुआ जैसा अल्लाह ने नूह को हुक्म दिया था।
171  GEN 7:11  यह सब कु उस वक़्त हुआ जब नूह 600 साल का था। दूसरे महीने के 17वें दिन ज़मीन की गहराइयों में से तमाम चश्मे फूट निकले और आसमान पर पानी के दरीचे खुल गए।
176  GEN 7:16  नरो-मादा आए थे। सब कु वैसा ही हुआ था जैसा अल्लाह ने नूह को हुक्म दिया था। फिर रब ने दरवाज़े को बंद कर दिया।
179  GEN 7:19  आख़िरकार पानी इतना ज़्यादा हो गया कि तमाम ऊँचे पहाड़ भी उसमें ुप गए,
181  GEN 7:21  ज़मीन पर रहनेवाली हर मख़लूक़ हलाक हुई। परिंदे, मवेशी, जंगली जानवर, तमाम जानदार जिनसे ज़मीन भरी हुई थी और इनसान, सब कु मर गया।
183  GEN 7:23  यों हर मख़लूक़ को रूए-ज़मीन पर से मिटा दिया गया। इनसान, ज़मीन पर फिरने और रेंगनेवाले जानवर और परिंदे, सब कु ख़त्म कर दिया गया। सिर्फ़ नूह और कश्ती में सवार उसके साथी बच गए।
190  GEN 8:6  चालीस दिन के बाद नूह ने कश्ती की खिड़की खोलकर एक कौवा ोड़ दिया, और वह उड़कर चला गया। लेकिन जब तक ज़मीन पर पानी था वह आता जाता रहा।
192  GEN 8:8  फिर नूह ने एक कबूतर ोड़ दिया ताकि पता चले कि ज़मीन पानी से निकल आई है या नहीं।
194  GEN 8:10  उसने एक हफ़ता और इंतज़ार करके कबूतर को दुबारा ोड़ दिया।
196  GEN 8:12  उसने मज़ीद एक हफ़ते के बाद कबूतर को ोड़ दिया। इस दफ़ा वह वापस न आया।
197  GEN 8:13  जब नूह 601 साल का था तो पहले महीने के पहले दिन ज़मीन की सतह पर पानी ख़त्म हो गया। तब नूह ने कश्ती की खोल दी और देखा कि ज़मीन की सतह पर पानी नहीं है।
204  GEN 8:20  उस वक़्त नूह ने रब के लिए क़ुरबानगाह बनाई। उसने तमाम फिरने और उड़नेवाले पाक जानवरों में से कु चुनकर उन्हें ज़बह किया और क़ुरबानगाह पर पूरी तरह जला दिया।
206  GEN 8:22  दुनिया के मुक़र्ररा औक़ात जारी रहेंगे। बीज बोने और फ़सल काटने का वक़्त, ठंड और तपिश, गरमियों और सर्दियों का मौसम, दिन और रात, यह सब कु दुनिया के अख़ीर तक क़ायम रहेगा।”
208  GEN 9:2  ज़मीन पर फिरने और रेंगनेवाले जानवर, परिंदे औरलियाँ सब तुमसे डरेंगे। उन्हें तुम्हारे इख़्तियार में कर दिया गया है।
220  GEN 9:14  जब कभी मेरे कहने पर आसमान पर बादल जाएंगे और क़ौसे-क़ुज़ह उनमें से नज़र आएगी
230  GEN 9:24  जब नूह होश में आया तो उसको पता चला कि सबसे ोटे बेटे ने क्या किया है।
244  GEN 10:9  रब के नज़दीक वह ज़बरदस्त शिकारी था। इसलिए आज भी किसी अच्शिकारी के बारे में कहा जाता है, “वह नमरूद की मानिंद है जो रब के नज़दीक ज़बरदस्त शिकारी था।”
300  GEN 12:1  रब ने अब्राम से कहा, “अपने वतन, अपने रिश्तेदारों और अपने बाप के घर को ोड़कर उस मुल्क में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊँगा।
309  GEN 12:10  उन दिनों में मुल्के-कनान में काल पड़ा। काल इतना सख़्त था कि अब्राम उससे बचने की ख़ातिर कु देर के लिए मिसर में जा बसा, लेकिन परदेसी की हैसियत से।
311  GEN 12:12  मिसरी तुझे देखेंगे, फिर कहेंगे, ‘यह इसका शौहर है।’ नतीजे में वह मुझे मार डालेंगे और तुझे ज़िंदा ोड़ेंगे।
312  GEN 12:13  इसलिए लोगों से यह कहते रहना कि मैं अब्राम की बहन हूँ। फिर मेरे साथ अच्सुलूक किया जाएगा और मेरी जान तेरे सबब से बच जाएगी।”
349  GEN 14:12  अब्राम का भतीजा लूत सदूम में रहता था, इसलिए वह उसे भी उस की मिलकियत समेत ीनकर साथ ले गए।
350  GEN 14:13  लेकिन एक आदमी ने जो बच निकला था इबरानी मर्द अब्राम के पास आकर उसे सब कु बता दिया। उस वक़्त वह ममरे के दरख़्तों के पास आबाद था। ममरे अमोरी था। वह और उसके भाई इसकाल और आनेर अब्राम के इत्तहादी थे।
360  GEN 14:23  कि मैं उसमें से कु नहीं लूँगा जो आपका है, चाहे वह धागा या जूती का तसमा ही क्यों न हो। ऐसा न हो कि आप कहें, ‘मैंने अब्राम को दौलतमंद बना दिया है।’
361  GEN 14:24  सिवाए उस खाने के जो मेरे आदमियों ने रास्ते में खाया है मैं कु क़बूल नहीं करूँगा। लेकिन मेरे इत्तहादी आनेर, इसकाल और ममरे ज़रूर अपना अपना हिस्सा लें।”
369  GEN 15:8  अब्राम ने पूा, “ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, मैं किस तरह जानूँ कि इस मुल्क पर क़ब्ज़ा करूँगा?”
373  GEN 15:12  जब सूरज डूबने लगा तो अब्राम पर गहरी नींद तारी हुई। उस पर दहशत और अंधेरा ही अंधेरा गया।
378  GEN 15:17  सूरज ग़ुरूब हुआ। अंधेरा गया। अचानक एक धुआँदार तनूर और एक भड़कती हुई मशाल नज़र आई और जानवरों के दो दो टुकड़ों के बीच में से गुज़रे।
395  GEN 16:13  रब के उसके साथ बात करने के बाद हाजिरा ने उसका नाम अत्ताएल-रोई यानी ‘तू एक माबूद है जो मुझे देखता है’ रखा। उसने कहा, “क्या मैंने वाक़ई उसके पीदेखा है जिसने मुझे देखा है?”
428  GEN 18:3  उसने कहा, “मेरे आक़ा, अगर मुझ पर आपके करम की नज़र है तो आगे न बढ़ें बल्कि कु देर अपने बंदे के घर ठहरें।
429  GEN 18:4  अगर इजाज़त हो तो मैं कु पानी ले आऊँ ताकि आप अपने पाँव धोकर दरख़्त के साय में आराम कर सकें।
430  GEN 18:5  साथ साथ मैं आपके लिए थोड़ा-बहुत खाना भी ले आऊँ ताकि आप तक़वियत पाकर आगे बढ़ सकें। मुझे यह करने दें, क्योंकि आप अपने ख़ादिम के घर आ गए हैं।” उन्होंने कहा, “ठीक है। जो कु तूने कहा है वह कर।”
432  GEN 18:7  फिर वह भागकर बैलों के पास पहुँचा। उनमें से उसने एक मोटा-ताज़ाड़ा चुन लिया जिसका गोश्त नरम था और उसे अपने नौकर को दिया जिसने जल्दी से उसे तैयार किया।
434  GEN 18:9  उन्होंने पूा, “तेरी बीवी सारा कहाँ है?” उसने जवाब दिया, “ख़ैमे में।”
435  GEN 18:10  रब ने कहा, “ऐन एक साल के बाद मैं वापस आऊँगा तो तेरी बीवी सारा के बेटा होगा।” सारा यह बातें सुन रही थी, क्योंकि वह उसके पीख़ैमे के दरवाज़े के पास थी।
438  GEN 18:13  रब ने इब्राहीम से पूा, “सारा क्यों हँस रही है? वह क्यों कह रही है, ‘क्या वाक़ई मेरे हाँ बच्चा पैदा होगा जबकि मैं इतनी उम्ररसीदा हूँ?’
442  GEN 18:17  रब ने दिल में कहा, “मैं इब्राहीम से वह काम क्यों ुपाए रखूँ जो मैं करने के लिए जा रहा हूँ?
447  GEN 18:22  दूसरे दो आदमी सदूम की तरफ़ आगे निकले जबकि रब कु देर के लिए वहाँ ठहरा रहा और इब्राहीम उसके सामने खड़ा रहा।
454  GEN 18:29  इब्राहीम ने अपनी बात जारी रखी, “और अगर सिर्फ़ 40 नेक लोग हों तो?” रब ने कहा, “मैं उन 40 के सबब से उन्हें ोड़ दूँगा।”
455  GEN 18:30  इब्राहीम ने कहा, “रब ग़ुस्सा न करे कि मैं एक दफ़ा और बात करूँ। शायद वहाँ सिर्फ़ 30 हों।” उसने जवाब दिया, “फिर भी उन्हें ोड़ दूँगा।”
464  GEN 19:6  लूत उनसे मिलने बाहर गया। उसने अपने पीदरवाज़ा बंद कर लिया
466  GEN 19:8  देखो, मेरी दो कुँवारी बेटियाँ हैं। उन्हें मैं तुम्हारे पास बाहर ले आता हूँ। फिर जो जी चाहे उनके साथ करो। लेकिन इन आदमियों को ोड़ दो, क्योंकि वह मेरे मेहमान हैं।”
469  GEN 19:11  उन्होंने ोटों से लेकर बड़ों तक बाहर के तमाम आदमियों को अंधा कर दिया, और वह दरवाज़े को ढूँडते ढूँडते थक गए।
475  GEN 19:17  ज्योंही वह उन्हें बाहर ले आए उनमें से एक ने कहा, “अपनी जान बचाकर चला जा। पीमुड़कर न देखना। मैदान में कहीं न ठहरना बल्कि पहाड़ों में पनाह लेना, वरना तू हलाक हो जाएगा।”
478  GEN 19:20  देख, क़रीब ही एक ोटा क़सबा है। वह इतना नज़दीक है कि मैं उस तरफ़ हिजरत कर सकता हूँ। मुझे वहाँ पनाह लेने दे। वह ोटा ही है, ना? फिर मेरी जान बचेगी।”
480  GEN 19:22  लेकिन भागकर वहाँ पनाह ले, क्योंकि जब तक तू वहाँ पहुँच न जाए मैं कु नहीं कर सकता।” इसलिए क़सबे का नाम ज़ुग़र यानी ोटा है।
484  GEN 19:26  लेकिन फ़रार होते वक़्त लूत की बीवी ने पीमुड़कर देखा तो वह फ़ौरन नमक का सतून बन गई।
489  GEN 19:31  एक दिन बड़ी बेटी ने ोटी से कहा, “अब्बू बूढ़ा है और यहाँ कोई मर्द है नहीं जिसके ज़रीए हमारे बच्चे पैदा हो सकें।
491  GEN 19:33  उस रात उन्होंने अपने बाप को मै पिलाई। जब वह नशे में था तो बड़ी बेटी अंदर जाकर उसके साथ हमबिसतर हुई। चूँकि लूत होश में नहीं था इसलिए उसे कु भी मालूम न हुआ।
492  GEN 19:34  अगले दिन बड़ी बहन ने ोटी बहन से कहा, “पिली रात मैं अब्बू से हमबिसतर हुई। आओ, आज रात को हम उसे दुबारा मै पिलाएँ। जब वह नशे में धुत हो तो तुम उसके साथ हमबिसतर होकर अपने लिए औलाद पैदा करना ताकि हमारी नसल क़ायम रहे।”
493  GEN 19:35  चुनाँचे उन्होंने उस रात भी अपने बाप को मै पिलाई। जब वह नशे में था तो ोटी बेटी उठकर उसके साथ हमबिसतर हुई। इस बार भी वह होश में नहीं था, इसलिए उसे कु भी मालूम न हुआ।
496  GEN 19:38  ोटी बेटी के हाँ भी बेटा पैदा हुआ। उसने उसका नाम बिन-अम्मी रखा। उससे अम्मोनी निकले हैं।
497  GEN 20:1  इब्राहीम वहाँ से जुनूब की तरफ़ दश्ते-नजब में चला गया और क़ादिस और शूर के दरमियान जा बसा। कु देर के लिए वह जिरार में ठहरा, लेकिन अजनबी की हैसियत से।
501  GEN 20:5  क्या इब्राहीम ने मुझसे नहीं कहा था कि सारा मेरी बहन है? और सारा ने उस की हाँ में हाँ मिलाई। मेरी नीयत अच्थी और मैंने ग़लत काम नहीं किया।”
502  GEN 20:6  अल्लाह ने कहा, “हाँ, मैं जानता हूँ कि इसमें तेरी नीयत अच्थी। इसलिए मैंने तुझे मेरा गुनाह करने और उसे ूने से रोक दिया।
504  GEN 20:8  अबीमलिक ने सुबह-सवेरे उठकर अपने तमाम कारिंदों को यह सब कु बताया। यह सुनकर उन पर दहशत गई।
522  GEN 21:8  इसहाक़ बड़ा होता गया। जब उसका दूध ुड़ाया गया तो इब्राहीम ने उसके लिए बड़ी ज़ियाफ़त की।
529  GEN 21:15  फिर पानी ख़त्म हो गया। हाजिरा लड़के को किसी झाड़ी के नीचे ोड़कर
536  GEN 21:22  उन दिनों में अबीमलिक और उसके सिपाहसालार फ़ीकुल ने इब्राहीम से कहा, “जो कु भी आप करते हैं अल्लाह आपके साथ है।