Wildebeest analysis examples for:   urd-urdgvh   ठ    February 11, 2023 at 19:52    Script wb_pprint_html.py   by Ulf Hermjakob

37  GEN 2:6  इसकी बजाए ज़मीन में से धुंधकर उस की पूरी सतह को तर करती थी।
54  GEN 2:23  उसे देखकर वह पुकारा, “वाह! यह तो मुझ जैसी ही है, मेरी हड्डियों में से हड्डी और मेरे गोश्त में से गोश्त है। इसका नाम नारी रखा जाए क्योंकि वह नर से निकाली गई है।”
64  GEN 3:8  शाम के वक़्त जब ंडी हवा चलने लगी तो उन्होंने रब ख़ुदा को बाग़ में चलते-फिरते सुना। वह डर के मारे दरख़्तों के पीछे छुप गए।
84  GEN 4:4  हाबील ने भी नज़राना पेश किया, लेकिन उसने अपनी भेड़-बकरियों के कुछ पहलौउनकी चरबी समेत चढ़ाए। हाबील का नज़राना रब को पसंद आया,
87  GEN 4:7  क्या अगर तू अच्छी नीयत रखता है तो अपनी नज़राकर मेरी तरफ़ नहीं देख सकेगा? लेकिन अगर अच्छी नीयत नहीं रखता तो ख़बरदार! गुनाह दरवाज़े पर दबका बैहै और तुझे चाहता है। लेकिन तेरा फ़र्ज़ है कि उस पर ग़ालिब आए।”
130  GEN 5:24  हनूक अल्लाह के साथ साथ चलता था। 365 साल की उम्र में वह ग़ायब हुआ, क्योंकि अल्लाह ने उसेलिया।
177  GEN 7:17  चालीस दिन तक तूफ़ानी सैलाब जारी रहा। पानी चढ़ा तो उसने कश्ती को ज़मीन पर सेलिया।
193  GEN 8:9  लेकिन कबूतर को कहीं भी बैने की जगह न मिली, क्योंकि अब तक पूरी ज़मीन पर पानी ही पानी था। वह कश्ती और नूह के पास वापस आ गया, और नूह ने अपना हाथ बढ़ाया और कबूतर को पकड़कर अपने पास कश्ती में रख लिया।
206  GEN 8:22  दुनिया के मुक़र्ररा औक़ात जारी रहेंगे। बीज बोने और फ़सल काटने का वक़्त, ंड और तपिश, गरमियों और सर्दियों का मौसम, दिन और रात, यह सब कुछ दुनिया के अख़ीर तक क़ायम रहेगा।”
250  GEN 10:15  कनान का पहलौसैदा था। कनान ज़ैल की क़ौमों का बाप भी था : हित्ती
276  GEN 11:9  इसलिए शहर का नाम बाबल यानी अबतरी हरा, क्योंकि रब ने वहाँ तमाम लोगों की ज़बान को दरहम-बरहम करके उन्हें तमाम रूए-ज़मीन पर मुंतशिर कर दिया।
305  GEN 12:6  अब्राम उस मुल्क में से गुज़रकर सिकम के मक़ाम पर हर गया जहाँ मोरिह के बलूत का दरख़्त था। उस ज़माने में मुल्क में कनानी क़ौमें आबाद थीं।
329  GEN 13:10  लूत ने अपनी नज़राकर देखा कि दरियाए-यरदन के पूरे इलाक़े में ज़ुग़र तक पानी की कसरत है। वह रब के बाग़ या मुल्के-मिसर की मानिंद था, क्योंकि उस वक़्त रब ने सदूम और अमूरा को तबाह नहीं किया था।
333  GEN 13:14  लूत अब्राम से जुदा हुआ तो रब ने अब्राम से कहा, “अपनी नज़राकर चारों तरफ़ यानी शिमाल, जुनूब, मशरिक़ और मग़रिब की तरफ़ देख।
336  GEN 13:17  चुनाँचेकर इस मुल्क की हर जगह चल-फिर, क्योंकि मैं इसे तुझे देता हूँ।”
410  GEN 17:12  लाज़िम है कि तू और तेरी औलाद नसल-दर-नसल अपने हर एक बेटे कावें दिन ख़तना करवाएँ। यह उसूल उस पर भी लागू है जो तेरे घर में रहता है लेकिन तुझसे रिश्ता नहीं रखता, चाहे वह घर में पैदा हुआ हो या किसी अजनबी से ख़रीदा गया हो।
426  GEN 18:1  एक दिन रब ममरे के दरख़्तों के पास इब्राहीम पर ज़ाहिर हुआ। इब्राहीम अपने ख़ैमे के दरवाज़े पर बैथा। दिन की गरमी उरूज पर थी।
428  GEN 18:3  उसने कहा, “मेरे आक़ा, अगर मुझ पर आपके करम की नज़र है तो आगे न बढ़ें बल्कि कुछ देर अपने बंदे के घर हरें।
430  GEN 18:5  साथ साथ मैं आपके लिए थोड़ा-बहुत खाना भी ले आऊँ ताकि आप तक़वियत पाकर आगे बढ़ सकें। मुझे यह करने दें, क्योंकि आप अपने ख़ादिम के घर आ गए हैं।” उन्होंने कहा,ीक है। जो कुछ तूने कहा है वह कर।”
437  GEN 18:12  इसलिए सारा अंदर ही अंदर हँस पड़ी और सोचा, “यह कैसे हो सकता है? क्या जब मैं बुढ़ापे के बाइस घिसे-फटे लिबास की मानिंद हूँ तो जवानी के जोबन का लुत्फ़ाऊँ? और मेरा शौहर भी बूढ़ा है।”
441  GEN 18:16  फिर मेहमानकर रवाना हुए और नीचे वादी में सदूम की तरफ़ देखने लगे। इब्राहीम उन्हें रुख़सत करने के लिए साथ साथ चल रहा था।
447  GEN 18:22  दूसरे दो आदमी सदूम की तरफ़ आगे निकले जबकि रब कुछ देर के लिए वहाँ हरा रहा और इब्राहीम उसके सामने खड़ा रहा।
459  GEN 19:1  शाम के वक़्त यह दो फ़रिश्ते सदूम पहुँचे। लूत शहर के दरवाज़े पर बैथा। जब उसने उन्हें देखा तो खड़े होकर उनसे मिलने गया और मुँह के बल गिरकर सिजदा किया।
460  GEN 19:2  उसने कहा, “साहबो, अपने बंदे के घर तशरीफ़ लाएँ ताकि अपने पाँव धोकर रात को हरें और फिर कल सुबह-सवेरेकर अपना सफ़र जारी रखें।” उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं, हम चौक में रात गुज़ारेंगे।”
475  GEN 19:17  ज्योंही वह उन्हें बाहर ले आए उनमें से एक ने कहा, “अपनी जान बचाकर चला जा। पीछे मुड़कर न देखना। मैदान में कहीं न हरना बल्कि पहाड़ों में पनाह लेना, वरना तू हलाक हो जाएगा।”
479  GEN 19:21  उसने कहा, “चलो, ीक है। तेरी यह दरख़ास्त भी मंज़ूर है। मैं यह क़सबा तबाह नहीं करूँगा।
485  GEN 19:27  इब्राहीम सुबह-सवेरेकर उस जगह वापस आया जहाँ वह कल रब के सामने खड़ा हुआ था।
486  GEN 19:28  जब उसने नीचे सदूम, अमूरा और पूरी वादी की तरफ़ नज़र की तो वहाँ से भट्टे का-सा धुआँ रहा था।
488  GEN 19:30  लूत और उस की बेटियाँ ज़्यादा देर तक ज़ुग़र में न हरे। वह रवाना होकर पहाड़ों में आबाद हुए, क्योंकि लूत ज़ुग़र में रहने से डरता था। वहाँ उन्होंने एक ग़ार को अपना घर बना लिया।
493  GEN 19:35  चुनाँचे उन्होंने उस रात भी अपने बाप को मै पिलाई। जब वह नशे में था तो छोटी बेटीकर उसके साथ हमबिसतर हुई। इस बार भी वह होश में नहीं था, इसलिए उसे कुछ भी मालूम न हुआ।
497  GEN 20:1  इब्राहीम वहाँ से जुनूब की तरफ़ दश्ते-नजब में चला गया और क़ादिस और शूर के दरमियान जा बसा। कुछ देर के लिए वह जिरार में हरा, लेकिन अजनबी की हैसियत से।
504  GEN 20:8  अबीमलिक ने सुबह-सवेरेकर अपने तमाम कारिंदों को यह सब कुछ बताया। यह सुनकर उन पर दहशत छा गई।
518  GEN 21:4  जब इसहाक़ दिन का था तो इब्राहीम ने उसका ख़तना कराया, जिस तरह अल्लाह ने उसे हुक्म दिया था।
528  GEN 21:14  इब्राहीम सुबह-सवेरेा। उसने रोटी और पानी की मशक हाजिरा के कंधों पर रखकर उसे लड़के के साथ घर से निकाल दिया। हाजिरा चलते चलते बैर-सबा के रेगिस्तान में इधर-उधर फिरने लगी।
530  GEN 21:16  कोई 300 फ़ुट दूर बै गई। क्योंकि उसने दिल में कहा, “मैं उसे मरते नहीं देख सकती।” वह वहाँ बैकर रोने लगी।
532  GEN 21:18  , लड़के कोाकर उसका हाथ थाम ले, क्योंकि मैं उससे एक बड़ी क़ौम बनाऊँगा।”
551  GEN 22:3  सुबह-सवेरे इब्राहीमऔर अपने गधे पर ज़ीन कसा। उसने अपने साथ दो नौकरों और अपने बेटे इसहाक़ को लिया। फिर वह क़ुरबानी को जलाने के लिए लकड़ी काटकर उस जगह की तरफ़ रवाना हुआ जो अल्लाह ने उसे बताई थी।
553  GEN 22:5  उसने नौकरों से कहा, “यहाँ गधे के पास हरो। मैं लड़के के साथ वहाँ जाकर परस्तिश करूँगा। फिर हम तुम्हारे पास वापस आ जाएंगे।”
554  GEN 22:6  इब्राहीम ने क़ुरबानी को जलाने के लिए लकड़ियाँ इसहाक़ के कंधों पर रख दीं और ख़ुद छुरी और आग जलाने के लिए अंगारों का बरतनाया। दोनों चल दिए।
569  GEN 22:21  उसके पहलौऊज़ के बाद बूज़, क़मुएल (अराम का बाप),
571  GEN 22:23  मिलकाह और नहूर के हाँ यह बेटे पैदा हुए। (बतुएल रिबक़ा का बाप था)।
575  GEN 23:3  फिर वह जनाज़े के पास सेऔर हित्तियों से बात की। उसने कहा,
579  GEN 23:7  इब्राहीमऔर मुल्क के बाशिंदों यानी हित्तियों के सामने ताज़ीमन झुक गया।
603  GEN 24:11  उसने ऊँटों को शहर के बाहर कुएँ के पास बिाया। शाम का वक़्त था जब औरतें कुएँ के पास आकर पानी भरती थीं।
641  GEN 24:49  अब मुझे बताएँ, क्या आप मेरे आक़ा पर अपनी मेहरबानी और वफ़ादारी का इज़हार करना चाहते हैं? अगर ऐसा है तो रिबक़ा की इसहाक़ के साथ शादी क़बूल करें। अगर आप मुत्तफ़िक़ नहीं हैं तो मुझे बताएँ ताकि मैं कोई और क़दमसकूँ।”
646  GEN 24:54  इसके बाद उसने अपने हमसफ़रों के साथ शाम का खाना खाया। वह रात को वहीं हरे। अगले दिन जबतो नौकर ने कहा, “अब हमें इजाज़त दें ताकि अपने आक़ा के पास लौट जाएँ।”
647  GEN 24:55  रिबक़ा के भाई और माँ ने कहा, “रिबक़ा कुछ दिन और हमारे हाँ हरे। फिर आप जाएँ।”
653  GEN 24:61  फिर रिबक़ा और उस की नौकरानियाँकर ऊँटों पर सवार हुईं और इब्राहीम के नौकर के पीछे हो लीं। चुनाँचे नौकर उन्हें साथ लेकर रवाना हो गया।
656  GEN 24:64  जब रिबक़ा ने अपनी नज़राकर इसहाक़ को देखा तो उसने ऊँट से उतरकर
690  GEN 25:31  याक़ूब ने कहा, “पहले मुझे पहलौका हक़ बेच दो।”
691  GEN 25:32  एसौ ने कहा, “मैं तो भूक से मर रहा हूँ, पहलौका हक़ मेरे किस काम का?”
692  GEN 25:33  याक़ूब ने कहा, “पहले क़सम खाकर मुझे यह हक़ बेच दो।” एसौ ने क़सम खाकर उसे पहलौका हक़ मुंतक़िल कर दिया।
693  GEN 25:34  तब याक़ूब ने उसे कुछ रोटी और दाल दे दी, और एसौ ने खाया और पिया। फिर वहकर चला गया। यों उसने पहलौके हक़ को हक़ीर जाना।
703  GEN 26:10  अबीमलिक ने कहा, “आपने हमारे साथ कैसा सुलूक कर दिखाया! कितनी आसानी से मेरे आदमियों में से कोई आपकी बीवी से हमबिसतर हो जाता। इस तरह हम आपके सबब से एक बड़े जुर्म के क़ुसूरवार हरते।”
724  GEN 26:31  फिर सुबह-सवेरेकर उन्होंने एक दूसरे के सामने क़सम खाई। इसके बाद इसहाक़ ने उन्हें रुख़सत किया और वह सलामती से रवाना हुए।
747  GEN 27:19  उसने कहा, “मैं आपका पहलौएसौ हूँ। मैंने वह किया है जो आपने मुझे कहा था। अब ज़राें और बैकर मेरे शिकार का खाना खाएँ ताकि आप बाद में मुझे बरकत दें।”
759  GEN 27:31  वह भी लज़ीज़ खाना पकाकर उसे अपने बाप के पास ले आया। उसने कहा, “अब्बू जी,ें और मेरे शिकार का खाना खाएँ ताकि आप मुझे बरकत दें।”
764  GEN 27:36  एसौ ने कहा, “उसका नाम याक़ूब ीक ही रखा गया है, क्योंकि अब उसने मुझे दूसरी बार धोका दिया है। पहले उसने पहलौका हक़ मुझसे छीन लिया और अब मेरी बरकत भी ज़बरदस्ती ले ली। क्या आपने मेरे लिए कोई बरकत महफ़ूज़ नहीं रखी?”
772  GEN 27:44  वहाँ कुछ दिन हरे रहना जब तक तुम्हारे भाई का ग़ुस्सा ंडा न हो जाए।
773  GEN 27:45  जब उसका ग़ुस्सा ंडा हो जाएगा और वह तुम्हारे उसके साथ किए गए सुलूक को भूल जाएगा, तब मैं इत्तला दूँगी कि तुम वहाँ से वापस आ सकते हो। मैं क्यों एक ही दिन में तुम दोनों से महरूम हो जाऊँ?”
790  GEN 28:16  तब याक़ूब जागा। उसने कहा, “यक़ीनन रब यहाँ हाज़िर है, और मुझे मालूम नहीं था।”
792  GEN 28:18  याक़ूब सुबह-सवेरेा। उसने वह पत्थर लिया जो उसने अपने सिरहाने रखा था और उसे सतून की तरह खड़ा किया। फिर उसने उस पर ज़ैतून का तेल उंडेल दिया।
865  GEN 30:34  लाबन ने कहा,ीक है। ऐसा ही हो जैसा आपने कहा है।”
886  GEN 31:12  फ़रिश्ते ने कहा, ‘अपनी नज़राकर उस पर ग़ौर कर जो हो रहा है। वह तमाम मेंढे और बकरे जो भेड़-बकरियों से मिलाप कर रहे हैं उनके जिस्म पर बड़े और छोटे धब्बे और धारियाँ हैं। मैं यह ख़ुद करवा रहा हूँ, क्योंकि मैंने वह सब कुछ देख लिया है जो लाबन ने तेरे साथ किया है।
887  GEN 31:13  मैं वह ख़ुदा हूँ जो बैतेल में तुझ पर ज़ाहिर हुआ था, उस जगह जहाँ तूने सतून पर तेल उंडेलकर उसे मेरे लिए मख़सूस किया और मेरे हुज़ूर क़सम खाई थी। अब और रवाना होकर अपने वतन वापस चला जा’।”
891  GEN 31:17  तब याक़ूब नेकर अपने बाल-बच्चों को ऊँटों पर बिाया
904  GEN 31:30  ीक है, आप इसलिए चले गए कि अपने बाप के घर वापस जाने के बड़े आरज़ूमंद थे। लेकिन यह आपने क्या किया है कि मेरे बुत चुरा लाए हैं?”
908  GEN 31:34  राख़िल बुतों को ऊँटों की एक काके नीचे छुपाकर उस पर बै गई थी। लाबन टटोल टटोलकर पूरे ख़ैमे में से गुज़रा लेकिन बुत न मिले।
909  GEN 31:35  राख़िल ने अपने बाप से कहा, “अब्बू, मुझसे नाराज़ न होना कि मैं आपके सामने खड़ी नहीं हो सकती। मैं ऐयामे-माहवारी के सबब से नहीं सकती।” लाबन उसे छोड़कर ढूँडता रहा, लेकिन कुछ न मिला।
920  GEN 31:46  उसने अपने रिश्तेदारों से कहा, “कुछ पत्थर जमा करें।” उन्होंने पत्थर जमा करके ढेर लगा दिया। फिर उन्होंने उस ढेर के पास बैकर खाना खाया।
939  GEN 32:11  मैं उस तमाम मेहरबानी और वफ़ादारी के लायक़ नहीं जो तूने अपने ख़ादिम को दिखाई है। जब मैंने लाबन के पास जाते वक़्त दरियाए-यरदन को पार किया तो मेरे पास सिर्फ़ यह लाथी, और अब मेरे पास यह दो गुरोह हैं।
951  GEN 32:23  उस रात वहऔर अपनी दो बीवियों, दो लौंडियों और ग्यारह बेटों को लेकर दरियाए-यब्बोक़ को वहाँ से पार किया जहाँ कम गहराई थी।
1012  GEN 34:31  लेकिन उन्होंने कहा, “क्या यह ीक था कि उसने हमारी बहन के साथ कसबी का-सा सुलूक किया?”
1013  GEN 35:1  अल्लाह ने याक़ूब से कहा, “उ, बैतेल जाकर वहाँ आबाद हो। वहीं अल्लाह के लिए जो तुझ पर ज़ाहिर हुआ जब तू अपने भाई एसौ से भाग रहा था क़ुरबानगाह बना।”
1034  GEN 35:22  जब वह वहाँ हरे थे तो रूबिन याक़ूब की हरम बिलहाह से हमबिसतर हुआ। याक़ूब को मालूम हो गया। याक़ूब के बारह बेटे थे।
1056  GEN 36:15  एसौ से मुख़्तलिफ़ क़बीलों के सरदार निकले। उसके पहलौइलीफ़ज़ से यह क़बायली सरदार निकले : तेमान, ओमर, सफ़ो, क़नज़,
1097  GEN 37:13  तो याक़ूब ने यूसुफ़ से कहा, “तेरे भाई सिकम में रेवड़ों को चरा रहे हैं। आ, मैं तुझे उनके पास भेज देता हूँ।” यूसुफ़ ने जवाब दिया,ीक है।”
1109  GEN 37:25  फिर वह रोटी खाने के लिए बै गए। अचानक इसमाईलियों का एक क़ाफ़िला नज़र आया। वह जिलियाद से मिसर जा रहे थे, और उनके ऊँट क़ीमती मसालों यानी लादन, बलसान और मुर से लदे हुए थे।
1134  GEN 38:14  यह सुनकर तमर ने बेवा के कपड़े उतारकर आम कपड़े पहन लिए। फिर वह अपना मुँह चादर से लपेटकर ऐनीम शहर के दरवाज़े पर बै गई जो तिमनत के रास्ते में था। तमर ने यह हरकत इसलिए की कि यहूदाह का बेटा सेला अब बालिग़ हो चुका था तो भी उस की उसके साथ शादी नहीं की गई थी।
1137  GEN 38:17  उसने जवाब दिया, “मैं आपको बकरी का बच्चा भेज दूँगा।” तमर ने कहा,ीक है, लेकिन उसे भेजने तक मुझे ज़मानत दें।”
1138  GEN 38:18  उसने पूछा, “मैं आपको क्या दूँ?” तमर ने कहा, “अपनी मुहर और उसे गले में लटकाने की डोरी। वह लाभी दें जो आप पकड़े हुए हैं।” चुनाँचे यहूदाह उसे यह चीज़ें देकर उसके साथ हमबिसतर हुआ। नतीजे में तमर उम्मीद से हुई।
1139  GEN 38:19  फिर तमरकर अपने घर वापस चली गई। उसने अपनी चादर उतारकर दुबारा बेवा के कपड़े पहन लिए।
1141  GEN 38:21  उसने ऐनीम के बाशिंदों से पूछा, “वह कसबी कहाँ है जो यहाँ सड़क पर बैथी?” उन्होंने जवाब दिया, “यहाँ ऐसी कोई कसबी नहीं थी।”
1145  GEN 38:25  तमर को जलाने के लिए बाहर लाया गया तो उसने अपने सुसर को ख़बर भेज दी, “यह चीज़ें देखें। यह उस आदमी की हैं जिसकी मारिफ़त मैं उम्मीद से हूँ। पता करें कि यह मुहर, उस की डोरी और यह लाकिसकी हैं।”
1149  GEN 38:29  लेकिन उसने अपना हाथ वापस खींच लिया, और उसका भाई पहले पैदा हुआ। यह देखकर दाई बोली, “तू किस तरह फूट निकला है!” उसने उसका नाम फ़ारस यानी फूट रखा।
1189  GEN 40:16  जब शाही बेकरी के इंचार्ज ने देखा कि सरदार साक़ी के ख़ाब का अच्छा मतलब निकला तो उसने यूसुफ़ से कहा, “मेरा ख़ाब भी सुनें। मैंने सर पर तीन टोकरियाँरखी थीं जो बेकरी की चीज़ों से भरी हुई थीं।
1200  GEN 41:4  पहली सात ख़ूबसूरत और मोटी मोटी गायों को खा गईं। इसके बाद मिसर का बादशाह जागा।
1203  GEN 41:7  अनाज की सात दुबली-पतली बालों ने सात मोटी और ख़ूबसूरत बालों को निगल लिया। फिर फ़िरौन जागतो मालूम हुआ कि मैंने ख़ाब ही देखा है।