Wildebeest analysis examples for:   urd-urdgvh   ड    February 11, 2023 at 19:52    Script wb_pprint_html.py   by Ulf Hermjakob

2  GEN 1:2  अभी तक ज़मीन वीरान और ख़ाली थी। वह गहरे पानी से ढकी हुई थी जिसके ऊपर अंधेरा ही अंधेरा था। अल्लाह का रूह पानी के ऊपर मँला रहा था।
16  GEN 1:16  अल्लाह ने दो़ी रौशनियाँ बनाईं, सूरज जो़ा था दिन पर हुकूमत करने को और चाँद जो छोटा था रात पर। इनके अलावा उसने सितारों को भी बनाया।
20  GEN 1:20  अल्लाह ने कहा, “पानी आबी जानदारों से भर जाए और फ़िज़ा में परिंदे़ते फिरें।”
21  GEN 1:21  अल्लाह ने़े ़े समुंदरी जानवर बनाए, पानी की तमाम दीगर मख़लूक़ात और हर क़िस्म के पर रखनेवाले जानदार भी बनाए। अल्लाह ने देखा कि यह अच्छा है।
36  GEN 2:5  तो शुरू में झा़ियाँ और पौदे नहीं उगते थे। वजह यह थी कि अल्लाह ने बारिश का इंतज़ाम नहीं किया था। और अभी इनसान भी पैदा नहीं हुआ था कि ज़मीन की खेतीबा़ी करता।
54  GEN 2:23  उसे देखकर वह पुकार उठा, “वाह! यह तो मुझ जैसी ही है, मेरीियों में सेऔर मेरे गोश्त में से गोश्त है। इसका नाम नारी रखा जाए क्योंकि वह नर से निकाली गई है।”
55  GEN 2:24  इसलिए मर्द अपने माँ-बाप को छो़कर अपनी बीवी के साथ पैवस्त हो जाता है, और वह दोनों एक हो जाते हैं।
64  GEN 3:8  शाम के वक़्त जब ठंहवा चलने लगी तो उन्होंने रब ख़ुदा को बाग़ में चलते-फिरते सुना। वह के मारे दरख़्तों के पीछे छुप गए।
66  GEN 3:10  आदम ने जवाब दिया, “मैंने तुझे बाग़ में चलते हुए सुना तो गया, क्योंकि मैं नंगा हूँ। इसलिए मैं छुप गया।”
71  GEN 3:15  मैं तेरे और औरत के दरमियान दुश्मनी पैदा करूँगा। उस की औलाद तेरी औलाद की दुश्मन होगी। वह तेरे सर को कुचल ालेगी जबकि तू उस की़ी पर काटेगा।”
73  GEN 3:17  आदम से उसने कहा, “तूने अपनी बीवी की बात मानी और उस दरख़्त का फल खाया जिसे खाने से मैंने मना किया था। इसलिए तेरे सबब से ज़मीन पर लानत है। उससे ख़ुराक हासिल करने के लिए तुझे उम्र-भर मेहनत-मशक़्क़त करनी़ेगी।
75  GEN 3:19  पसीना बहा बहाकर तुझे रोटी कमाने के लिए भाग-दौकरनी़ेगी। और यह सिलसिला मौत तक जारी रहेगा। तू मेहनत करते करते दुबारा ज़मीन में लौट जाएगा, क्योंकि तू उसी से लिया गया है। तू ख़ाक है और दुबारा ख़ाक में मिल जाएगा।”
79  GEN 3:23  इसलिए रब ख़ुदा ने उसे बाग़े-अदन से निकालकर उस ज़मीन की खेतीबा़ी करने की ज़िम्मादारी दी जिसमें से उसे लिया गया था।
80  GEN 3:24  इनसान को ख़ारिज करने के बाद उसने बाग़े-अदन के मशरिक़ में करूबी फ़रिश्ते़े किए और साथ साथ एक आतिशी तलवार रखी जो इधर-उधर घूमती थी ताकि उस रास्ते की हिफ़ाज़त करे जो ज़िंदगी बख़्शनेवाले दरख़्त तक पहुँचाता था।
82  GEN 4:2  बाद में क़ाबील का भाई हाबील पैदा हुआ। हाबील भे़-बकरियों का चरवाहा बन गया जबकि क़ाबील खेतीबा़ी करने लगा।
84  GEN 4:4  हाबील ने भी नज़राना पेश किया, लेकिन उसने अपनी भे़-बकरियों के कुछ पहलौठे उनकी चरबी समेत चढ़ाए। हाबील का नज़राना रब को पसंद आया,
85  GEN 4:5  मगर क़ाबील का नज़राना मंज़ूर न हुआ। यह देखकर क़ाबील़े ग़ुस्से में आ गया, और उसका मुँह बिगगया।
88  GEN 4:8  एक दिन क़ाबील ने अपने भाई से कहा, “आओ, हम बाहर खुले मैदान में चलें।” और जब वह खुले मैदान में थे तो क़ाबील ने अपने भाई हाबील पर हमला करके उसे मार ाला।
91  GEN 4:11  इसलिए तुझ पर लानत है और ज़मीन ने तुझे रद्द किया है, क्योंकि ज़मीन को मुँह खोलकर तेरे हाथ से क़त्ल किए हुए भाई का ख़ून पीना़ा।
92  GEN 4:12  अब से जब तू खेतीबा़ी करेगा तो ज़मीन अपनी पैदावार देने से इनकार करेगी। तू मफ़रूर होकर मारा मारा फिरेगा।”
94  GEN 4:14  आज तू मुझे ज़मीन की सतह से भगा रहा है और मुझे तेरे हुज़ूर से भी छुप जाना है। मैं मफ़रूर की हैसियत से मारा मारा फिरता रहूँगा, इसलिए जिसको भी पता चलेगा कि मैं कहाँ हूँ वह मुझे क़त्ल कर ालेगा।”
104  GEN 4:24  एक आदमी ने मुझे ज़ख़मी किया तो मैंने उसे मार ाला। एक़के ने मेरे चोट लगाई तो मैंने उसे क़त्ल कर दिया। जो क़ाबील को क़त्ल करे उससे सात गुना बदला लिया जाएगा, लेकिन जो लमक को क़त्ल करे उससे सतत्तर गुना बदला लिया जाएगा।”
135  GEN 5:29  उसने उसका नाम नूह यानी तसल्ली रखा, क्योंकि उसने उसके बारे में कहा, “हमारा खेतीबा़ी का काम निहायत तकलीफ़देह है, इसलिए कि अल्लाह ने ज़मीन पर लानत भेजी है। लेकिन अब हम बेटे की मारिफ़त तसल्ली पाएँगे।”
143  GEN 6:5  रब ने देखा कि इनसान निहायत बिगगया है, कि उसके तमाम ख़यालात लगातार बुराई की तरफ़ मायल रहते हैं।
145  GEN 6:7  उसने कहा, “गो मैं ही ने इनसान को ख़लक़ किया मैं उसे रूए-ज़मीन पर से मिटा ालूँगा। मैं न सिर्फ़ लोगों को बल्कि ज़मीन पर चलने-फिरने और रेंगनेवाले जानवरों और हवा के परिंदों को भी हलाक कर दूँगा, क्योंकि मैं पछताता हूँ कि मैंने उनको बनाया।”
149  GEN 6:11  लेकिन दुनिया अल्लाह की नज़र में बिग़ी हुई और ज़ुल्मो-तशद्दुद से भरी हुई थी।
150  GEN 6:12  जहाँ भी अल्लाह देखता दुनिया ख़राब थी, क्योंकि तमाम जानदारों ने ज़मीन पर अपनी रविश को बिगादिया था।
152  GEN 6:14  अब अपने लिए सरो की लक़ी की कश्ती बना ले। उसमें कमरे हों और उसे अंदर और बाहर तारकोल लगा।
153  GEN 6:15  उस की लंबाई 450 फ़ुट, चौ़ाई 75 फ़ुट और ऊँचाई 45 फ़ुट हो।
155  GEN 6:17  मैं पानी का इतना़ा सैलाब लाऊँगा कि वह ज़मीन के तमाम जानदारों को हलाक कर ालेगा। ज़मीन पर सब कुछ फ़ना हो जाएगा।
162  GEN 7:2  हर क़िस्म के पाक जानवरों में से सात सात नरो-मादा के जो़े जबकि नापाक जानवरों में से नरो-मादा का सिर्फ़ एक एक जो़ा साथ ले जाना।
163  GEN 7:3  इसी तरह हर क़िस्म के पर रखनेवालों में से सात सात नरो-मादा के जो़े भी साथ ले जाना ताकि उनकी नसलें बची रहें।
164  GEN 7:4  एक हफ़ते के बाद मैं चालीस दिन और चालीस रात मुतवातिर बारिश बरसाऊँगा। इससे मैं तमाम जानदारों को रूए-ज़मीन पर से मिटा ालूँगा, अगरचे मैं ही ने उन्हें बनाया है।”
178  GEN 7:18  पानी ज़ोर पक़कर बहुत बढ़ गया, और कश्ती उस पर तैरने लगी।
179  GEN 7:19  आख़िरकार पानी इतना ज़्यादा हो गया कि तमाम ऊँचे पहाभी उसमें छुप गए,
184  GEN 7:24  सैलाब ेढ़ सौ दिन तक ज़मीन पर ग़ालिब रहा।
188  GEN 8:4  सातवें महीने के 17वें दिन कश्ती अरारात के एक पहापर टिक गई।
189  GEN 8:5  दसवें महीने के पहले दिन पानी इतना कम हो गया था कि पहा़ों की चोटियाँ नज़र आने लगी थीं।
190  GEN 8:6  चालीस दिन के बाद नूह ने कश्ती की खि़की खोलकर एक कौवा छोदिया, और वह़कर चला गया। लेकिन जब तक ज़मीन पर पानी था वह आता जाता रहा।
192  GEN 8:8  फिर नूह ने एक कबूतर छोदिया ताकि पता चले कि ज़मीन पानी से निकल आई है या नहीं।
193  GEN 8:9  लेकिन कबूतर को कहीं भी बैठने की जगह न मिली, क्योंकि अब तक पूरी ज़मीन पर पानी ही पानी था। वह कश्ती और नूह के पास वापस आ गया, और नूह ने अपना हाथ बढ़ाया और कबूतर को पक़कर अपने पास कश्ती में रख लिया।
194  GEN 8:10  उसने एक हफ़ता और इंतज़ार करके कबूतर को दुबारा छोदिया।
196  GEN 8:12  उसने मज़ीद एक हफ़ते के बाद कबूतर को छोदिया। इस दफ़ा वह वापस न आया।
204  GEN 8:20  उस वक़्त नूह ने रब के लिए क़ुरबानगाह बनाई। उसने तमाम फिरने औऱनेवाले पाक जानवरों में से कुछ चुनकर उन्हें ज़बह किया और क़ुरबानगाह पर पूरी तरह जला दिया।
206  GEN 8:22  दुनिया के मुक़र्ररा औक़ात जारी रहेंगे। बीज बोने और फ़सल काटने का वक़्त, ठं और तपिश, गरमियों और सर्दियों का मौसम, दिन और रात, यह सब कुछ दुनिया के अख़ीर तक क़ायम रहेगा।”
208  GEN 9:2  ज़मीन पर फिरने और रेंगनेवाले जानवर, परिंदे और मछलियाँ सब तुमसे रेंगे। उन्हें तुम्हारे इख़्तियार में कर दिया गया है।
211  GEN 9:5  किसी की जान लेना मना है। जो ऐसा करेगा उसे अपनी जान देनी़ेगी, ख़ाह वह इनसान हो या हैवान। मैं ख़ुद इसका मुतालबा करूँगा।
227  GEN 9:21  अंगूर से मै बनाकर उसने इतनी पी ली कि वह नशे में धुत अपने ेरे में नंगा़ा रहा।
228  GEN 9:22  कनान के बाप हाम ने उसे यों़ा हुआ देखा तो बाहर जाकर अपने दोनों भाइयों को उसके बारे में बताया।
229  GEN 9:23  यह सुनकर सिम और याफ़त ने अपने कंधों पर कप़ा रखा। फिर वह उलटे चलते हुए ेरे में दाख़िल हुए और कप़ा अपने बाप पर ाल दिया। उनके मुँह दूसरी तरफ़ मु़े रहे ताकि बाप की बरहनगी नज़र न आए।
233  GEN 9:27  अल्लाह करे कि याफ़त की हुदूद बढ़ जाएँ। याफ़त सिम के ेरों में रहे और कनान उसका ग़ुलाम हो।”
247  GEN 10:12  और रसन के शहर तामीर किए।़ा शहर रसन नीनवा और कलह के दरमियान वाक़े है।
256  GEN 10:21  सिम याफ़त का़ा भाई था। उसके भी बेटे पैदा हुए। सिम तमाम बनी इबर का बाप है।
265  GEN 10:30  वह मेसा से लेकर सफ़ार और मशरिक़ी पहा़ी इलाक़े तक आबाद थे।
300  GEN 12:1  रब ने अब्राम से कहा, “अपने वतन, अपने रिश्तेदारों और अपने बाप के घर को छो़कर उस मुल्क में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊँगा।
301  GEN 12:2  मैं तुझसे एक़ी क़ौम बनाऊँगा, तुझे बरकत दूँगा और तेरे नाम को बहुत बढ़ाऊँगा। तू दूसरों के लिए बरकत का बाइस होगा।
307  GEN 12:8  वहाँ से वह उस पहा़ी इलाक़े की तरफ़ गया जो बैतेल के मशरिक़ में है। वहाँ उसने अपना ख़ैमा लगाया। मग़रिब में बैतेल था और मशरिक़ में अई। इस जगह पर भी उसने रब की ताज़ीम में क़ुरबानगाह बनाई और रब का नाम लेकर इबादत की।
308  GEN 12:9  फिर अब्राम दुबारा रवाना होकर जुनूब के दश्ते-नजब की तरफ़ चल़ा।
309  GEN 12:10  उन दिनों में मुल्के-कनान में काल़ा। काल इतना सख़्त था कि अब्राम उससे बचने की ख़ातिर कुछ देर के लिए मिसर में जा बसा, लेकिन परदेसी की हैसियत से।
311  GEN 12:12  मिसरी तुझे देखेंगे, फिर कहेंगे, ‘यह इसका शौहर है।’ नतीजे में वह मुझे मार ालेंगे और तुझे ज़िंदा छो़ेंगे।
315  GEN 12:16  फ़िरौन ने सारय की ख़ातिर अब्राम पर एहसान करके उसे भे़-बकरियाँ, गाय-बैल, गधे-गधियाँ, नौकर-चाकर और ऊँट दिए।
322  GEN 13:3  वहाँ से जगह बजगह चलते हुए वह आख़िरकार बैतेल से होकर उस मक़ाम तक पहुँच गया जहाँ उसने शुरू में अपना ेरा लगाया था और जो बैतेल और अई के दरमियान था।
324  GEN 13:5  लूत के पास भी बहुत-सी भे़-बकरियाँ, गाय-बैल और ख़ैमे थे।
325  GEN 13:6  नतीजा यह निकला कि आख़िरकार वह मिलकर न रह सके, क्योंकि इतनी जगह नहीं थी कि दोनों के रेवएक ही जगह पर चर सकें।
326  GEN 13:7  अब्राम और लूत के चरवाहे आपस में झग़ने लगे। (उस ज़माने में कनानी और फ़रिज़्ज़ी भी मुल्क में आबाद थे।)
327  GEN 13:8  तब अब्राम ने लूत से बात की, “ऐसा नहीं होना चाहिए कि तेरे और मेरे दरमियान झग़ा हो या तेरे चरवाहों और मेरे चरवाहों के दरमियान। हम तो भाई हैं।
337  GEN 13:18  अब्राम रवाना हुआ। चलते चलते उसने अपने ेरे हबरून के क़रीब ममरे के दरख़्तों के पास लगाए। वहाँ उसने रब की ताज़ीम में क़ुरबानगाह बनाई।
343  GEN 14:6  और होरियों को उनके पहा़ी इलाक़े सईर में शिकस्त दी। यों वह एल-फ़ारान तक पहुँच गए जो रेगिस्तान के किनारे पर है।
345  GEN 14:8  उस वक़्त सदूम, अमूरा, अदमा, ज़बोईम और बाला यानी ज़ुग़र के बादशाह उनसे़ने के लिए सिद्दीम की वादी में जमा हुए।
347  GEN 14:10  इस वादी में तारकोल के मुतअद्दिद गढ़े थे। जब बाग़ी बादशाह शिकस्त खाकर भागने लगे तो सदूम और अमूरा के बादशाह इन गढ़ों में गिर गए जबकि बाक़ी तीन बादशाह बचकर पहा़ी इलाक़े में फ़रार हुए।
362  GEN 15:1  इसके बाद रब रोया में अब्राम से हमकलाम हुआ, “अब्राम, मत र। मैं ही तेरी सिपर हूँ, मैं ही तेरा बहुत़ा अज्र हूँ।”
373  GEN 15:12  जब सूरज ूबने लगा तो अब्राम पर गहरी नींद तारी हुई। उस पर दहशत और अंधेरा ही अंधेरा छा गया।
375  GEN 15:14  लेकिन मैं उस क़ौम की अदालत करूँगा जिसने उसे ग़ुलाम बनाया होगा। इसके बाद वह़ी दौलत पाकर उस मुल्क से निकलेंगे।
378  GEN 15:17  सूरज ग़ुरूब हुआ। अंधेरा छा गया। अचानक एक धुआँदार तनूर और एक़कती हुई मशाल नज़र आई और जानवरों के दो दो टुक़ों के बीच में से गुज़रे।
383  GEN 16:1  अब तक अब्राम की बीवी सारय के कोई बच्चा नहीं हुआ था। लेकिन उन्होंने एक मिसरी लौंरखी थी जिसका नाम हाजिरा था,
384  GEN 16:2  और एक दिन सारय ने अब्राम से कहा, “रब ने मुझे बच्चे पैदा करने से महरूम रखा है, इसलिए मेरी लौंके साथ हमबिसतर हों। शायद मुझे उस की मारिफ़त बच्चा मिल जाए।” अब्राम ने सारय की बात मान ली।
385  GEN 16:3  चुनाँचे सारय ने अपनी मिसरी लौंहाजिरा को अपने शौहर अब्राम को दे दिया ताकि वह उस की बीवी बन जाए उस वक़्त अब्राम को कनान में बसते हुए दस साल हो गए थे।
388  GEN 16:6  अब्राम ने जवाब दिया, “देखो, यह तुम्हारी लौंहै और तुम्हारे इख़्तियार में है। जो तुम्हारा जी चाहे उसके साथ करो।” इस पर सारय उससे इतना बुरा सुलूक करने लगी कि हाजिरा फ़रार हो गई।
390  GEN 16:8  उसने कहा, “सारय की लौंहाजिरा, तू कहाँ से आ रही है और कहाँ जा रही है?” हाजिरा ने जवाब दिया, “मैं अपनी मालिकन सारय से फ़रार हो रही हूँ।”
396  GEN 16:14  इसलिए उस जगह के कुएँ का नाम ‘बैर-लही-रोई’ यानी ‘उस ज़िंदा हस्ती का कुआँ जो मुझे देखता है’गया। वह क़ादिस और बरद के दरमियान वाक़े है।