885 | GEN 31:11 | उस ख़ाब में अल्लाह के फ़रिश्ते ने मुझसे बात की, ‘याक़ूब!’ मैंने कहा, ‘जी, मैं हाज़िर हूँ।’ |
3098 | LEV 13:45 | वबाई जिल्दी बीमारी का मरीज़ फटे कपड़े पहने। उसके बाल बिखरे रहें। वह अपनी मूँछों को किसी कपड़े से छुपाए और पुकारता रहे, ‘नापाक, नापाक।’ |
3815 | NUM 5:22 | जब लानत का यह पानी आपके पेट में उतरे तो आप बाँझ हो जाएँ और आपका पेट फूल जाए।’ इस पर औरत कहे, ‘आमीन, ऐसा ही हो।’ |
4424 | NUM 23:7 | बिलाम बोल उठा, “बलक़ मुझे अराम से यहाँ लाया है, मोआबी बादशाह ने मुझे मशरिक़ी पहाड़ों से बुलाकर कहा, ‘आओ, याक़ूब पर मेरे लिए लानत भेजो। आओ, इसराईल को बददुआ दो।’ |
6766 | JDG 9:10 | इसके बाद दरख़्तों ने अंजीर के दरख़्त से बात की, ‘आएँ, हमारे बादशाह बन जाएँ!’ |
6768 | JDG 9:12 | फिर दरख़्तों ने अंगूर की बेल से बात की, ‘आएँ, हमारे बादशाह बन जाएँ!’ |
7520 | 1SA 14:10 | लेकिन अगर वह पुकारें, ‘आओ, हमारे पास आ जाओ!’ तो हम ज़रूर उनके पास चढ़ जाएंगे। क्योंकि यह इसका निशान होगा कि रब उन्हें हमारे क़ब्ज़े में कर देगा।” |
7927 | 1SA 26:19 | गुज़ारिश है कि मेरा आक़ा और बादशाह अपने ख़ादिम की बात सुने। अगर रब ने आपको मेरे ख़िलाफ़ उकसाया हो तो वह मेरी ग़ल्ला की नज़र क़बूल करे। लेकिन अगर इनसान इसके पीछे हैं तो रब के सामने उन पर लानत! अपनी हरकतों से उन्होंने मुझे मेरी मौरूसी ज़मीन से निकाल दिया है और नतीजे में मैं रब की क़ौम में नहीं रह सकता। हक़ीक़त में वह कह रहे हैं, ‘जाओ, दीगर माबूदों की पूजा करो!’ |
8032 | 2SA 1:7 | कि उसने मुड़कर मुझे देखा और अपने पास बुलाया। मैंने कहा, ‘जी, मैं हाज़िर हूँ।’ |
9706 | 2KI 6:28 | फिर भी मुझे बताएँ, मसला क्या है?” औरत बोली, “इस औरत ने मुझसे कहा था, ‘आएँ, आज आप अपने बेटे को क़ुरबान करें ताकि हम उसे खा लें, तो फिर कल हम मेरे बेटे को खा लेंगे।’ |
12530 | NEH 9:15 | जब वह भूके थे तो तूने उन्हें आसमान से रोटी खिलाई, और जब प्यासे थे तो तूने उन्हें चटान से पानी पिलाया। तूने हुक्म दिया, ‘जाओ, मुल्क में दाख़िल होकर उस पर क़ब्ज़ा कर लो, क्योंकि मैंने हाथ उठाकर क़सम खाई है कि तुम्हें यह मुल्क दूँगा।’ |
13137 | JOB 12:5 | जो सुकून से ज़िंदगी गुज़ारता है वह मुसीबतज़दा को हक़ीर जानता है। वह कहता है, ‘आओ, हम उसे ठोकर मारें जिसके पाँव डगमगाने लगे हैं।’ |
13413 | JOB 22:20 | ‘लो, यह देखो, उनकी जायदाद किस तरह मिट गई, उनकी दौलत किस तरह भस्म हो गई है!’ |
13536 | JOB 28:28 | इनसान से उसने कहा, ‘सुनो, अल्लाह का ख़ौफ़ मानना ही हिकमत और बुराई से दूर रहना ही समझ है’।” |
13734 | JOB 35:10 | लेकिन कोई नहीं कहता, ‘अल्लाह, मेरा ख़ालिक़ कहाँ है? वह कहाँ है जो रात के दौरान नग़मे अता करता, |
19059 | JER 2:25 | ऐ इसराईल, इतना न दौड़ कि तेरे जूते घिसकर फट जाएँ और तेरा गला ख़ुश्क हो जाए। लेकिन अफ़सोस, तू बज़िद है, ‘नहीं, मुझे छोड़ दे! मैं अजनबी माबूदों को प्यार करती हूँ, और लाज़िम है कि मैं उनके पीछे भागती जाऊँ।’ |
19162 | JER 6:4 | वह कहेंगे, ‘आओ, हम उससे लड़ने के लिए तैयार हो जाएँ। आओ, हम दोपहर के वक़्त हमला करें! लेकिन अफ़सोस, दिन ढल रहा है, और शाम के साय लंबे होते जा रहे हैं। |
19175 | JER 6:17 | देखो, मैंने तुम पर पहरेदार मुक़र्रर किए और कहा, ‘जब नरसिंगा फूँका जाएगा तो ध्यान दो!’ लेकिन तुमने इनकार किया, ‘नहीं, हम तवज्जुह नहीं देंगे।’ |
19263 | JER 9:18 | क्योंकि सिय्यून से गिर्या की आवाज़ें बुलंद हो रही हैं, ‘हाय, हमारे साथ कैसी ज़्यादती हुई है, हमारी कैसी रुसवाई हुई है! हम मुल्क को छोड़ने पर मजबूर हैं, क्योंकि दुश्मन ने हमारे घरों को ढा दिया है’।” |
19541 | JER 22:18 | चुनाँचे रब यहूदाह के बादशाह यहूयक़ीम बिन यूसियाह के बारे में फ़रमाता है, “लोग उस पर मातम नहीं करेंगे कि ‘हाय मेरे भाई, हाय मेरी बहन,’ न वह रोकर कहेंगे, ‘हाय, मेरे आक़ा! हाय, उस की शान जाती रही है।’ |
19754 | JER 30:18 | रब फ़रमाता है, ‘देखो, मैं याक़ूब के ख़ैमों की बदनसीबी ख़त्म करूँगा, मैं इसराईल के घरों पर तरस खाऊँगा। तब यरूशलम को खंडरात पर नए सिरे से तामीर किया जाएगा, और महल को दुबारा उस की पुरानी जगह पर खड़ा किया जाएगा। |
19778 | JER 31:18 | “इसराईल की गिर्याओ-ज़ारी मुझ तक पहुँच गई है। क्योंकि वह कहता है, ‘हाय, तूने मेरी सख़्त तादीब की है। मेरी यों तरबियत हुई है जिस तरह बछड़े की होती है जब उस की गरदन पर पहली बार जुआ रखा जाता है। ऐ रब, मुझे वापस ला ताकि मैं वापस आऊँ, क्योंकि तू ही रब मेरा ख़ुदा है। |
19843 | JER 32:43 | बेशक तुम इस वक़्त कहते हो, ‘हाय, हमारा मुल्क वीरानो-सुनसान है, उसमें न इनसान और न हैवान रह गया है, क्योंकि सब कुछ बाबल के हवाले कर दिया गया है।’ लेकिन मैं फ़रमाता हूँ कि पूरे मुल्क में दुबारा खेत ख़रीदे |
19875 | JER 34:5 | बल्कि तबई मौत मरेगा, और लोग उसी तरह तेरी ताज़ीम में लकड़ी का बड़ा ढेर बनाकर आग लगाएँगे जिस तरह तेरे बापदादा के लिए करते आए हैं। वह तुझ पर भी मातम करेंगे और कहेंगे, ‘हाय, मेरे आक़ा!’ यह रब का फ़रमान है।” |
19888 | JER 34:18 | ‘देखो, यहूदाह और यरूशलम के बुज़ुर्गों, दरबारियों, इमामों और अवाम ने मेरे साथ अहद बाँधा। इसकी तसदीक़ करने के लिए वह एक बछड़े को दो हिस्सों में तक़सीम करके उनके दरमियान से गुज़र गए। तो भी उन्होंने अहद तोड़कर उस की शरायत पूरी न कीं। चुनाँचे मैं होने दूँगा कि वह उस बछड़े की मानिंद हो जाएँ जिसके दो हिस्सों में से वह गुज़र गए हैं। |
19903 | JER 35:11 | हम सिर्फ़ आरिज़ी तौर पर शहर में ठहरे हुए हैं। क्योंकि जब शाहे-बाबल नबूकदनज़्ज़र इस मुल्क में घुस आया तो हम बोले, ‘आएँ, हम यरूशलम शहर में जाएँ ताकि बाबल और शाम की फ़ौजों से बच जाएँ।’ हम सिर्फ़ इसी लिए यरूशलम में ठहरे हुए हैं।” |
19986 | JER 38:22 | शाही महल में जितनी ख़वातीन बच गई हैं उन सबको शाहे-बाबल के अफ़सरों के पास पहुँचाया जाएगा। तब यह ख़वातीन आपके बारे में कहेंगी, ‘हाय, जिन आदमियों पर तू पूरा एतमाद रखता था वह फ़रेब देकर तुझ पर ग़ालिब आ गए हैं। तेरे पाँव दलदल में धँस गए हैं, लेकिन यह लोग ग़ायब हो गए हैं।’ |
20112 | JER 45:3 | कि तू कहता है, ‘हाय, मुझ पर अफ़सोस! रब ने मेरे दर्द में इज़ाफ़ा कर दिया है, अब मुझे रंजो-अलम भी सहना पड़ता है। मैं कराहते कराहते थक गया हूँ। कहीं भी आरामो-सुकून नहीं मिलता।’ |
20130 | JER 46:16 | उसने मुतअद्दिद अफ़राद को ठोकर खाने दिया, और वह एक दूसरे पर गिर गए। उन्होंने कहा, ‘आओ, हम अपनी ही क़ौम और अपने वतन में वापस चले जाएँ जहाँ ज़ालिम की तलवार हम तक नहीं पहुँच सकती।’ |
20148 | JER 47:6 | ‘हाय, ऐ रब की तलवार, क्या तू कभी नहीं आराम करेगी? दुबारा अपने मियान में छुप जा! ख़ामोश होकर आराम कर!’ |
20166 | JER 48:17 | ऐ पड़ोस में बसनेवालो, उस पर मातम करो! जितने उस की शोहरत जानते हो आहो-ज़ारी करो। बोलो, ‘हाय, मोआब का ज़ोरदार असाए-शाही टूट गया है, उस की शानो-शौकत की अलामत ख़ाक में मिलाई गई है।’ |
20225 | JER 49:29 | तुम उनके ख़ैमों, भेड़-बकरियों और ऊँटों को छीन लोगे, उनके ख़ैमों के परदों और बाक़ी सामान को लूट लोगे। चीख़ें सुनाई देंगी, ‘हाय, चारों तरफ़ दहशत ही दहशत’!” |
20240 | JER 50:5 | वह सिय्यून का रास्ता पूछ पूछकर अपना रुख़ उस तरफ़ कर लेंगे और कहेंगे, ‘आओ, हम रब के साथ लिपट जाएँ, हम उसके साथ अबदी अहद बाँध लें जो कभी न भुलाया जाए।’ |
20854 | EZK 16:23 | रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, ‘अफ़सोस, तुझ पर अफ़सोस! अपनी बाक़ी तमाम शरारतों के अलावा |
21160 | EZK 25:8 | “रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मोआब और सईर इसराईल का मज़ाक़ उड़ाकर कहते हैं, ‘लो, देखो यहूदाह के घराने का हाल! अब वह भी बाक़ी क़ौमों की तरह बन गया है।’ |
21171 | EZK 26:2 | “ऐ आदमज़ाद, सूर बेटी यरूशलम की तबाही देखकर ख़ुश हुई है। वह कहती है, ‘लो, अक़वाम का दरवाज़ा टूट गया है! अब मैं ही इसकी ज़िम्मादारियाँ निभाऊँगी। अब जब यरूशलम वीरान है तो मैं ही फ़रोग़ पाऊँगी।’ |
21186 | EZK 26:17 | तब वह तुझ पर मातम करके गीत गाएँगे, ‘हाय, तू कितने धड़ाम से गिरकर तबाह हुई है! ऐ साहिली शहर, ऐ सूर बेटी, पहले तू अपने बाशिंदों समेत समुंदर के दरमियान रहकर कितनी मशहूर और ताक़तवर थी। गिर्दो-नवाह के तमाम बाशिंदे तुझसे दहशत खाते थे। |
21338 | EZK 32:21 | तब पाताल में बड़े सूरमे मिसर और उसके मददगारों का इस्तक़बाल करके कहेंगे, ‘लो, अब यह भी उतर आए हैं, यह भी यहाँ पड़े नामख़तूनों और मक़तूलों में शामिल हो गए हैं।’ |
21379 | EZK 33:30 | ऐ आदमज़ाद, तेरे हमवतन अपने घरों की दीवारों और दरवाज़ों के पास खड़े होकर तेरा ज़िक्र करते हैं। वह कहते हैं, ‘आओ, हम नबी के पास जाकर वह पैग़ाम सुनें जो रब की तरफ़ से आया है।’ |
21534 | EZK 39:17 | ऐ आदमज़ाद, रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि हर क़िस्म के परिंदे और दरिंदे बुलाकर कह, ‘आओ, इधर जमा हो जाओ! चारों तरफ़ से आकर इसराईल के पहाड़ी इलाक़े में जमा हो जाओ! क्योंकि यहाँ मैं तुम्हारे लिए क़ुरबानी की ज़बरदस्त ज़ियाफ़त तैयार कर रहा हूँ। यहाँ तुम्हें गोश्त खाने और ख़ून पीने का सुनहरा मौक़ा मिलेगा। |
22492 | AMO 4:13 | क्योंकि अल्लाह ही पहाड़ों को तश्कील देता, हवा को ख़लक़ करता और अपने ख़यालात को इनसान पर ज़ाहिर करता है। वही तड़का और अंधेरा पैदा करता और वही ज़मीन की बुलंदियों पर चलता है। उसका नाम ‘रब, लशकरों का ख़ुदा’ है। |
22508 | AMO 5:16 | चुनाँचे रब जो लशकरों का ख़ुदा और हमारा आक़ा है फ़रमाता है, “तमाम चौकों में आहो-बुका होगी, तमाम गलियों में लोग ‘हाय, हाय’ करेंगे। खेतीबाड़ी करनेवालों को भी बुलाया जाएगा ताकि पेशावराना तौर पर सोग मनानेवालों के साथ गिर्याओ-ज़ारी करें। |
22668 | MIC 2:4 | उस दिन लोग अपने गीतों में तुम्हारा मज़ाक़ उड़ाएँगे, वह मातम का तलख़ गीत गाकर तुम्हें लान-तान करेंगे, ‘हाय, हम सरासर तबाह हो गए हैं! मेरी क़ौम की मौरूसी ज़मीन दूसरों के हाथ में आ गई है। वह किस तरह मुझसे छीन ली गई है! हमारे काम के जवाब में हमारे खेत दूसरों में तक़सीम हो रहे हैं’।” |
23066 | ZEC 8:21 | एक शहर के बाशिंदे दूसरे शहर में जाकर कहेंगे, ‘आओ, हम यरूशलम जाकर रब से इलतमास करें, रब्बुल-अफ़वाज की मरज़ी दरियाफ़्त करें। हम भी जाएंगे।’ |
23171 | MAL 1:13 | तुम शिकायत करते हो, ‘हाय, यह ख़िदमत कितनी तकलीफ़देह है!’ और क़ुरबानी की आग को हिक़ारत की नज़रों से देखते हुए तेज़ करते हो। हर क़िस्म का जानवर पेश किया जाता है, ख़ाह वह ज़ख़मी, लँगड़ा या बीमार क्यों न हो।” रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है, “क्या मैं तुम्हारे हाथों से ऐसी क़ुरबानियाँ क़बूल कर सकता हूँ? हरगिज़ नहीं! |
23389 | MAT 7:4 | तू क्योंकर अपने भाई से कह सकता है, ‘ठहरो, मुझे तुम्हारी आँख में पड़ा तिनका निकालने दो,’ जबकि तेरी अपनी आँख में शहतीर है। |
23406 | MAT 7:21 | जो मुझे ‘ख़ुदावंद, ख़ुदावंद’ कहते हैं उनमें से सब आसमान की बादशाही में दाख़िल न होंगे बल्कि सिर्फ़ वह जो मेरे आसमानी बाप की मरज़ी पर अमल करते हैं। |
23538 | MAT 11:10 | उसी के बारे में कलामे-मुक़द्दस में लिखा है, ‘देख, मैं अपने पैग़ंबर को तेरे आगे आगे भेज देता हूँ जो तेरे सामने रास्ता तैयार करेगा।’ |
23576 | MAT 12:18 | ‘देखो, मेरा ख़ादिम जिसे मैंने चुन लिया है, मेरा प्यारा जो मुझे पसंद है। मैं अपने रूह को उस पर डालूँगा, और वह अक़वाम में इनसाफ़ का एलान करेगा। |
23635 | MAT 13:27 | नौकर मालिक के पास आए और कहने लगे, ‘जनाब, क्या आपने अपने खेत में अच्छा बीज नहीं बोया था? तो फिर यह ख़ुदरौ पौदे कहाँ से आ गए हैं?’ |
23874 | MAT 20:13 | लेकिन ज़मीनदार ने उनमें से एक से बात की, ‘यार, मैंने ग़लत काम नहीं किया। क्या तू चाँदी के एक सिक्के के लिए मज़दूरी करने पर मुत्तफ़िक़ न हुआ था? |
23916 | MAT 21:21 | ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुमको सच बताता हूँ, अगर तुम शक न करो बल्कि ईमान रखो तो फिर तुम न सिर्फ़ ऐसा काम कर सकोगे बल्कि इससे भी बड़ा। तुम इस पहाड़ से कहोगे, ‘उठ, अपने आपको समुंदर में गिरा दे’ तो यह हो जाएगा। |
23923 | MAT 21:28 | तुम्हारा क्या ख़याल है? एक आदमी के दो बेटे थे। बाप बड़े बेटे के पास गया और कहा, ‘बेटा, आज अंगूर के बाग़ में जाकर काम कर।’ |
23953 | MAT 22:12 | बादशाह ने पूछा, ‘दोस्त, तुम शादी का लिबास पहने बग़ैर अंदर किस तरह आए?’ वह आदमी कोई जवाब न दे सका। |
24049 | MAT 24:23 | उस वक़्त अगर कोई तुमको बताए, ‘देखो, मसीह यहाँ है’ या ‘वह वहाँ है’ तो उस की बात न मानना। |
24052 | MAT 24:26 | चुनाँचे अगर कोई तुमको बताए, ‘देखो, वह रेगिस्तान में है’ तो वहाँ जाने के लिए न निकलना। और अगर कोई कहे, ‘देखो, वह अंदरूनी कमरों में है’ तो उसका यक़ीन न करना। |
24083 | MAT 25:6 | आधी रात को शोर मच गया, ‘देखो, दूल्हा पहुँच रहा है, उसे मिलने के लिए निकलो!’ |
24086 | MAT 25:9 | दूसरी कुँवारियों ने जवाब दिया, ‘नहीं, ऐसा न हो कि न सिर्फ़ तुम्हारे लिए बल्कि हमारे लिए भी तेल काफ़ी न हो। दुकान पर जाकर अपने लिए ख़रीद लो।’ |
24097 | MAT 25:20 | तो पहला नौकर जिसे 5,000 सिक्के मिले थे मज़ीद 5,000 सिक्के लेकर आया। उसने कहा, ‘जनाब, आपने 5,000 सिक्के मेरे सुपुर्द किए थे। यह देखें, मैंने मज़ीद 5,000 सिक्के हासिल किए हैं।’ |
24098 | MAT 25:21 | उसके मालिक ने जवाब दिया, ‘शाबाश, मेरे अच्छे और वफ़ादार नौकर। तुम थोड़े में वफ़ादार रहे, इसलिए मैं तुम्हें बहुत कुछ पर मुक़र्रर करूँगा। अंदर आओ और अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो जाओ।’ |
24099 | MAT 25:22 | फिर दूसरा नौकर आया जिसे 2,000 सिक्के मिले थे। उसने कहा, ‘जनाब, आपने 2,000 सिक्के मेरे सुपुर्द किए थे। यह देखें, मैंने मज़ीद 2,000 सिक्के हासिल किए हैं।’ |
24100 | MAT 25:23 | उसके मालिक ने जवाब दिया, ‘शाबाश, मेरे अच्छे और वफ़ादार नौकर। तुम थोड़े में वफ़ादार रहे, इसलिए मैं तुम्हें बहुत कुछ पर मुक़र्रर करूँगा। अंदर आओ और अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो जाओ।’ |
24101 | MAT 25:24 | फिर तीसरा नौकर आया जिसे 1,000 सिक्के मिले थे। उसने कहा, ‘जनाब, मैं जानता था कि आप सख़्त आदमी हैं। जो बीज आपने नहीं बोया उस की फ़सल आप काटते हैं और जो कुछ आपने नहीं लगाया उस की पैदावार जमा करते हैं। |
24111 | MAT 25:34 | फिर बादशाह दहने हाथवालों से कहेगा, ‘आओ, मेरे बाप के मुबारक लोगो! जो बादशाही दुनिया की तख़लीक़ से तुम्हारे लिए तैयार है उसे मीरास में ले लो। |
24114 | MAT 25:37 | फिर यह रास्तबाज़ लोग जवाब में कहेंगे, ‘ख़ुदावंद, हमने आपको कब भूका देखकर खाना खिलाया, आपको कब प्यासा देखकर पानी पिलाया? |
24121 | MAT 25:44 | फिर वह जवाब में पूछेंगे, ‘ख़ुदावंद, हमने आपको कब भूका, प्यासा, अजनबी, नंगा, बीमार या जेल में पड़ा देखा और आपकी ख़िदमत न की?’ |
24286 | MRK 1:2 | जो यसायाह नबी की पेशगोई के मुताबिक़ यों शुरू हुई : ‘देख, मैं अपने पैग़ंबर को तेरे आगे आगे भेज देता हूँ जो तेरे लिए रास्ता तैयार करेगा। |
24338 | MRK 2:9 | क्या मफ़लूज से यह कहना आसान है कि ‘तेरे गुनाह मुआफ़ कर दिए गए हैं’ या यह कि ‘उठ, अपनी चारपाई उठाकर चल-फिर’? |
24732 | MRK 11:23 | मैं तुमको सच बताता हूँ कि अगर कोई इस पहाड़ से कहे, ‘उठ, अपने आपको समुंदर में गिरा दे’ तो यह हो जाएगा। शर्त सिर्फ़ यह है कि वह शक न करे बल्कि ईमान रखे कि जो कुछ उसने कहा है वह उसके लिए हो जाएगा। |
24807 | MRK 13:21 | उस वक़्त अगर कोई तुमको बताए, ‘देखो, मसीह यहाँ है,’ या ‘वह वहाँ है’ तो उस की बात न मानना। |
25257 | LUK 6:42 | तू क्योंकर अपने भाई से कह सकता है, ‘भाई, ठहरो, मुझे तुम्हारी आँख में पड़ा तिनका निकालने दो’ जबकि तुझे अपनी आँख का शहतीर नज़र नहीं आता? रियाकार! पहले अपनी आँख के शहतीर को निकाल। तब ही तुझे भाई का तिनका साफ़ नज़र आएगा और तू उसे अच्छी तरह से देखकर निकाल सकेगा। |
25261 | LUK 6:46 | तुम क्यों मुझे ‘ख़ुदावंद, ख़ुदावंद’ कहकर पुकारते हो? मेरी बात पर तो तुम अमल नहीं करते। |
25479 | LUK 11:5 | फिर उसने उनसे कहा, “अगर तुममें से कोई आधी रात के वक़्त अपने दोस्त के घर जाकर कहे, ‘भाई, मुझे तीन रोटियाँ दे, बाद में मैं यह वापस कर दूँगा। |
25595 | LUK 13:8 | लेकिन माली ने कहा, ‘जनाब, इसे एक साल और रहने दें। मैं इसके इर्दगिर्द गोडी करके खाद डालूँगा। |
25612 | LUK 13:25 | एक वक़्त आएगा कि घर का मालिक उठकर दरवाज़ा बंद कर देगा। फिर तुम बाहर खड़े रहोगे और खटखटाते खटखटाते इलतमास करोगे, ‘ख़ुदावंद, हमारे लिए दरवाज़ा खोल दें।’ लेकिन वह जवाब देगा, ‘न मैं तुमको जानता हूँ, न यह कि तुम कहाँ के हो।’ |
25632 | LUK 14:10 | इसलिए ऐसा मत करना बल्कि जब तुझे दावत दी जाए तो जाकर आख़िरी कुरसी पर बैठ जा। फिर जब मेज़बान तुझे वहाँ बैठा हुआ देखेगा तो वह कहेगा, ‘दोस्त, सामनेवाली कुरसी पर बैठ।’ इस तरह तमाम मेहमानों के सामने तेरी इज़्ज़त हो जाएगी। |
25639 | LUK 14:17 | जब ज़ियाफ़त का वक़्त आया तो उसने अपने नौकर को मेहमानों को इत्तला देने के लिए भेजा कि ‘आएँ, सब कुछ तैयार है।’ |
25643 | LUK 14:21 | नौकर ने वापस आकर मालिक को सब कुछ बताया। वह ग़ुस्से होकर नौकर से कहने लगा, ‘जा, सीधे शहर की सड़कों और गलियों में जाकर वहाँ के ग़रीबों, लँगड़ों, अंधों और मफ़लूजों को ले आ।’ नौकर ने ऐसा ही किया। |
25644 | LUK 14:22 | फिर वापस आकर उसने मालिक को इत्तला दी, ‘जनाब, जो कुछ आपने कहा था पूरा हो चुका है। लेकिन अब भी मज़ीद लोगों के लिए गुंजाइश है।’ |
25686 | LUK 15:29 | लेकिन उसने जवाब में अपने बाप से कहा, ‘देखें, मैंने इतने साल आपकी ख़िदमत में सख़्त मेहनत-मशक़्क़त की है और एक दफ़ा भी आपकी मरज़ी की ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की। तो भी आपने मुझे इस पूरे अरसे में एक छोटा बकरा भी नहीं दिया कि उसे ज़बह करके अपने दोस्तों के साथ ज़ियाफ़त करता। |
25688 | LUK 15:31 | बाप ने जवाब दिया, ‘बेटा, आप तो हर वक़्त मेरे पास रहे हैं, और जो कुछ मेरा है वह आप ही का है। |
25714 | LUK 16:25 | लेकिन इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘बेटा, याद रख कि तुझे अपनी ज़िंदगी में बेहतरीन चीज़ें मिल चुकी हैं जबकि लाज़र को बदतरीन चीज़ें। लेकिन अब उसे आराम और तसल्ली मिल गई है जबकि तुझे अज़ियत। |
25719 | LUK 16:30 | अमीर ने अर्ज़ की, ‘नहीं, मेरे बाप इब्राहीम, अगर कोई मुरदों में से उनके पास जाए तो फिर वह ज़रूर तौबा करेंगे।’ |
25816 | LUK 19:16 | पहला नौकर आया। उसने कहा, ‘जनाब, आपके एक सिक्के से दस हो गए हैं।’ |
25817 | LUK 19:17 | मालिक ने कहा, ‘शाबाश, अच्छे नौकर। तू थोड़े में वफ़ादार रहा, इसलिए अब तुझे दस शहरों पर इख़्तियार मिलेगा।’ |
25818 | LUK 19:18 | फिर दूसरा नौकर आया। उसने कहा, ‘जनाब, आपके एक सिक्के से पाँच हो गए हैं।’ |
25820 | LUK 19:20 | फिर एक और नौकर आकर कहने लगा, ‘जनाब, यह आपका सिक्का है। मैंने इसे कपड़े में लपेटकर महफ़ूज़ रखा, |
25825 | LUK 19:25 | उन्होंने एतराज़ किया, ‘जनाब, उसके पास तो पहले ही दस सिक्के हैं।’ |
27211 | ACT 7:26 | अगले दिन वह दो इसराईलियों के पास से गुज़रा जो आपस में लड़ रहे थे। उसने सुलह कराने की कोशिश में कहा, ‘मर्दो, आप तो भाई हैं। आप क्यों एक दूसरे से ग़लत सुलूक कर रहे हैं?’ |
27225 | ACT 7:40 | वह हारून से कहने लगे, ‘आएँ, हमारे लिए देवता बना दें जो हमारे आगे आगे चलते हुए हमारी राहनुमाई करें। क्योंकि क्या मालूम कि उस बंदे मूसा को क्या हुआ है जो हमें मिसर से निकाल लाया।’ |
27359 | ACT 10:31 | उसने कहा, ‘कुरनेलियुस, अल्लाह ने तुम्हारी दुआ सुन ली और तुम्हारी ख़ैरात का ख़याल किया है। |
27383 | ACT 11:7 | फिर एक आवाज़ मुझसे मुख़ातिब हुई, ‘पतरस, उठ! कुछ ज़बह करके खा!’ |
27779 | ACT 22:7 | मैं ज़मीन पर गिर पड़ा तो एक आवाज़ सुनाई दी, ‘साऊल, साऊल, तू मुझे क्यों सताता है?’ |
27780 | ACT 22:8 | मैंने पूछा, ‘ख़ुदावंद, आप कौन हैं?’ आवाज़ ने जवाब दिया, ‘मैं ईसा नासरी हूँ जिसे तू सताता है।’ |
27782 | ACT 22:10 | मैंने पूछा, ‘ख़ुदावंद, मैं क्या करूँ?’ ख़ुदावंद ने जवाब दिया, ‘उठकर दमिश्क़ में जा। वहाँ तुझे वह सारा काम बताया जाएगा जो अल्लाह तेरे ज़िम्मे लगाने का इरादा रखता है।’ |
27793 | ACT 22:21 | लेकिन ख़ुदावंद ने कहा, ‘जा, क्योंकि मैं तुझे दूर-दराज़ इलाक़ों में ग़ैरयहूदियों के पास भेज दूँगा’।” |
27905 | ACT 26:14 | हम सब ज़मीन पर गिर गए और मैंने अरामी ज़बान में एक आवाज़ सुनी, ‘साऊल, साऊल, तू मुझे क्यों सताता है? यों मेरे आँकुस के ख़िलाफ़ पाँव मारना तेरे लिए ही दुश्वारी का बाइस है।’ |
27906 | ACT 26:15 | मैंने पूछा, ‘ख़ुदावंद, आप कौन हैं?’ ख़ुदावंद ने जवाब दिया, ‘मैं ईसा हूँ, वही जिसे तू सताता है। |
27947 | ACT 27:24 | उसने कहा, ‘पौलुस, मत डर। लाज़िम है कि तुझे शहनशाह के सामने पेश किया जाए। और अल्लाह अपनी मेहरबानी से तेरे वास्ते तमाम हमसफ़रों की जानें भी बचाए रखेगा।’ |