|
2330 | ख़ालिस सोने की तख़्ती बनाकर उस पर यह अलफ़ाज़ कंदा करना, ‘रब के लिए मख़सूसो-मुक़द्दस।’ यह अलफ़ाज़ यों कंदा किए जाएँ जिस तरह मुहर कंदा की जाती है। | |
2695 | उन्होंने मुक़द्दस ताज यानी ख़ालिस सोने की तख़्ती बनाई और उस पर यह अलफ़ाज़ कंदा किए, ‘रब के लिए मख़सूसो-मुक़द्दस।’ | |
18607 | तब वह पानी के दरमियान की हरियाली की तरह फूट निकलेंगे, नहरों पर सफ़ेदा के दरख़्तों की तरह फलें-फूलेंगे।’ | |
21968 | और लिखा यह है, ‘मिने मिने तक़ेलो-फ़रसीन।’ |